अब वर्मी कंपोस्ट बनाने का प्रशिक्षण ले रहे हैं यूपी के किसान
गोंडा: यूपी के गोंडा जिले के दीनदयाल अध्ययन संस्थान गोपाल ग्राम में किसानों को वर्मी कंपोस्ट तैयार करने की जानकारी दी जा रही है। इससे किसानों को काफी लाभ हो रहा है। वर्मी कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया काफी सरल है, थोड़ी जानकारी और ठीक अनुपात से ठीक खाद तैयार हो सकती है जिससे किसानों को बहुत लाभ होगा। इसी उद्देश्य से गोंडा में ये काम हो रहा है। जानते हैं विस्तार से।

किसानों को दी जा रही प्रक्रिया की जानकारी
मीडिया से वार्ता के दौरान डाक्टर अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि वर्मी कंपोस्ट कैसे तैयार करें इसकी जानकारी किसानों को दीनदयाल अध्ययन संस्थान गोपाल ग्राम में दिया जा रही है। यहां वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने की तकनीक पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्मी कंपोस्ट जैविक खेती के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है, जो मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के साथ-साथ रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करता है।
क्या है इस परीक्षण का उद्देश्य
डॉ। अभिषेक मिश्रा के अनुसार, इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को स्वावलंबी बनाना और उन्हें टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित करना है। वर्मी कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया में मुख्यतः गोबर, पत्तियां, जैविक कचरा और आइसेनिया फ़ेटिडा (लाल केंचुआ) का इस्तेमाल होता है। यह प्रक्रिया सरल और कम लागत वाली है, जिससे छोटे और मझोले किसान भी इसे सरलता से अपना सकते हैं। इस पहल से किसानों को खेती की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिल रही है। साथ ही, जैविक खेती को प्रोत्साहन मिल रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए भी फायदेमंद है।
जिन किसानों के पास नहीं है जगह
वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए यदि किसी किसान भाई के पास पर्याप्त स्थान नहीं है तो वे बाजार में मिलने वाले रेडीमेड बेड को लाकर उसमें वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार कर सकते हैं। जहां तक इसे तैयार करने की बात है तो एक तरफ फुल बेड तैयार करें और एक तरफ बेड में बीच में नाली की तरह वर्मी कंपोस्ट तैयार करें। वहीं एक तरफ आधे बेड में वर्मी कंपोस्ट तैयार करें और एक तरफ खाली छोड़ दें, इससे कभी वर्मी कंपोस्ट की कमा नहीं होगी।

