शीतला अष्टमी के दिन इन जादुई उपायों को करने से कट जाते हैं जन्मों के पाप
सनातन धर्म में शीतला अष्टमी का पर्व बहुत ही जरूरी माना जाता है. वैदिक पंचांग के मुताबिक चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का व्रत रखा जाता है. यह पर्व होली के 8 दिन बाद मनाया जाता है. यह व्रत गर्मियों की आरंभ का प्रतीक भी माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन माता रानी की पूजा और उपवास करने से सभी तरह की इच्छा पूरी भी होती है. साथ ही बीमारी और गुनाह से भी मुक्ति मिलती है. इस दिन कुछ खास तरीका करने से बीमारी और गुनाह से छुटकारा पाया जा सकता है, तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं.

कब है शुभ मूहुर्त
अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि वैदिक पंचांग के मुताबिक चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की आरंभ 22 मार्च को सुबह 4:23 से प्रारम्भ होकर 23 मार्च को सुबह 5:23 पर खत्म होगा. उदया तिथि के मुताबिक शीतला अष्टमी का व्रत 22 मार्च को रखा जाएगा. इस दिन कुछ खास तरीका करने से बीमारी और कष्ट से मुक्ति भी मिलती है.
कैसे करें पूजा
शीतला अष्टमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में माता शीतला की पूजा आराधना करनी चाहिए. माता रानी को कुमकुम रोली अक्षत और लाल रंग का फूल अर्पित करना चाहिए. इसके अतिरिक्त माता शीतला को पूरी और हलवे का भोग लगाना चाहिए. ऐसा करने से बीमारी गुनाह से मुक्ति मिलती है. साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है.
इस मंत्र का करें जप
इसके साथ ही सभी कष्टों से मुक्ति के लिए शीतला अष्टमी पर ‘ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः’ मंत्र का जप करना चाहिए. ऐसा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है.
दान-दक्षिणा भी है जरूरी
इस दिन गरीब जरूरतमंद लोगों को दान दक्षिणा भी करना चाहिए, क्योंकि इस दिन के अनुष्ठान का अहम हिस्सा दान दक्षिणा भी माना जाता है.

