उत्तर प्रदेश

Parliament session: अखिलेश यादव ने संभल के मामले पर लगाई गुहार

Parliament session: कई दिनों तक हंगामे के बाद मंगलवार को संसद के दोनों सदनों राज्यसभा और लोकसभा में सामान्य रूप से कामकाज प्रारम्भ हो गया और सदस्यों ने सार्वजनिक महत्व के मामले उठाए. सपा (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी के संभल में पिछले दिनों हुई अत्याचार को ‘सोची-समझी साजिश’ करार देते हुए मंगलवार को लोकसभा में मांग की कि घटना के लिए उत्तरदायी पुलिस और प्रशासन के ऑफिसरों को निलंबित किया जाए और उन पर मर्डर का केस चलाया जाए.

Parliament winter session 2024 1

कन्नौज से समाजवादी पार्टी सांसद अखिलेश यादव ने निचले सदन में शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए कहा, ‘‘संभल में पिछले दिनों अचानक हुई अत्याचार की घटना को सोची-समझी षड्यंत्र के अनुसार अंजाम दिया गया. संभल में वर्षों से लोग भाईचारे से रहते आए हैं. इस घटना से इस भाईचारे को ‘गोली मारने’ का काम किया गया.

उन्होंने संभल की शाही जामा मस्जिद में सर्वे का जिक्र करते हुए इस तरह की घटनाओं के लिए सत्तारूढ़ बीजेपी (भाजपा) पर निशाना साधा. यादव ने कहा, ‘‘देश के कोने-कोने में बीजेपी और उसके सहयोगी, समर्थक और शुभचिंतक बार-बार ‘खुदाई’ की बात करते हैं जिससे राष्ट्र का सौहार्द, भाईचारा और गंगा-जमुनी तहजीब खो जाएगी.

उन्होंने दावा किया कि एक बार क्षेत्रीय न्यायालय के आदेश पर संभल की शाही जामा मस्जिद के अंदर सर्वे का काम पूरा कर चुके पुलिस और प्रशासन के अधिकारी कुछ दिन बाद दोबारा सर्वे के लिए पहुंच गए और उनके पास न्यायालय का कोई आदेश नहीं था.

यादव ने इल्जाम लगाया कि इस दौरान सूचना मिलने पर मस्जिद पहुंच गए क्षेत्रीय लोगों ने जब कार्रवाई का कारण जानना चाहा तो पुलिस क्षेत्राधिकारी ने बदसलूकी की और नाराज होकर कुछ लोगों ने पथराव कर दिया जिसके बाद पुलिस गोलीबारी में पांच मासूम मारे गए.

उन्होंने कहा, ‘‘संभल का माहौल बिगाड़ने में सर्वे की याचिका दाखिल करने वाले लोगों के साथ-साथ पुलिस प्रशासन के लोग उत्तरदायी हैं. उत्तरदायी ऑफिसरों को निलंबित किया जाना चाहिए और उन पर मर्डर का केस चलना चाहिए.

यादव ने कहा, ‘‘हम यूं ही नहीं कहते कि गवर्नमेंट संविधान को नहीं मानती.कांग्रेस पार्टी के उज्ज्वल रमण सिंह ने भी शून्यकाल में इस मामले को उठाते हुए बोला कि संभल को न्याय मिलना चाहिए और पूरे घटनाक्रम की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवारत न्यायाधीश के नेतृत्व में कराई जानी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘दोषी ऑफिसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए.” इससे पहले समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के सदस्यों ने संभल में अत्याचार की घटना के विरोध में प्रश्नकाल के दौरान सदन से वॉकआउट किया.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान द्रमुक नेता टी आर बालू से चुटीले अंदाज में प्रश्न किया कि क्या वह उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और गुजरात में अपनी पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं. उन्होंने यह टिप्पणी उस समय की जब बालू ने मनरेगा से जुड़ा पूरक प्रश्न पूछा. बालू ने इस मामले को उठाते हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और गुजरात में मनरेगा का मानदेय कम होने का दावा किया.

इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘क्या बालू जी, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात में पार्टी का विस्तार करना चाह रहे हो?” मनरेगा से जुड़े पूरक प्रश्न पूछे जाने के दौरान बिरला ने तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी पर भी व्यंग्यात्मक अंदाज में टिप्पणी की. प्रश्नकाल में पूरक प्रश्न पूछने के लिए आसन से नाम पुकारे जाने पर जब बनर्जी खड़े नहीं हुए जो बिरला ने कहा, ‘‘थोड़ा कानों को ठीक रखो कल्याण बाबू.

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को लोकसभा में इल्जाम लगाया कि पश्चिम बंगाल में ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी’ (मनरेगा) योजना के अनुसार बजट आवंटन का दुरुपयोग किया गया तथा ‘अपात्र’ लोगों को फायदा पहुंचाने का क्राइम किया गया है. चौहान ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी के पूरक प्रश्न पूछे जाने के बाद यह टिप्पणी की. बनर्जी ने पूरक प्रश्न पूछते हुए इल्जाम लगाया कि मनरेगा के बजट आवंटन में पश्चिम बंगाल के साथ भेदभाव किया जा रहा है और उसे देय राशि रोकी गई.

तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सांसद के पूरक प्रश्न के उत्तर में चौहान ने कहा, ‘‘यह राशि निश्चित उद्देश्यों के लिए होती है. यदि राशि निश्चित उद्देश्यों की पूर्ति में खर्च नहीं की जाती तो इसे रोका जा सकता है. ” उन्होंने इल्जाम लगाया कि कुछ निश्चित लोगों को फायदा पहुंचाने का क्राइम पश्चिम बंगाल में किया गया. चौहान ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में पात्रों को अपात्र और अपात्रों को पात्र कर दिया गया है. यह साबित हो गया…ग्रामीण विकास योजनाओं का नाम बदल दिया गया, जबकि नाम नहीं बदला जा सकता.

उनका बोलना था, ‘‘यह राशि दुरुपयोग के लिए नहीं है. जो गड़बड़ की गई, उस पर पश्चिम बंगाल गवर्नमेंट ने कारगर कार्रवाई नहीं की.” मंत्री ने कहा, ‘‘(केंद्र में) उधर (कांग्रेस) की गवर्नमेंट थी तो राशि की बंदरबाट होती थी, लेकिन यह मोदी की गवर्नमेंट में नहीं होता है. (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी जी कहते हैं कि न खाऊंगा, न खाने दूंगा.

उनके उत्तर के दौरान तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने टोकाटोकी की. मनरेगा से जुड़े कुछ पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने बोला कि धन के आवंटन की कमी की बात गलत है तथा मानदेय कम होने की बात भी गलत है क्योंकि इसका निर्धारण महंगाई से जुड़ा है. उन्होंने बोला कि मनरेगा के बजट में हर वर्ष 10-20 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई.

कई दिनों तक हंगामे के बाद मंगलवार को राज्यसभा में सामान्य रूप से कामकाज प्रारम्भ हो गया और सदस्यों ने सार्वजनिक महत्व के मामले उठाए. शुरुआती हंगामे के बाद सदन में शून्यकाल संपन्न हुआ और उसके बाद प्रश्नकाल लिया गया. राज्यसभा में 25 नवंबर को शीतकालीन सत्र प्रारम्भ होने के बाद से कोई खास कामकाज नहीं हो पाया था क्योंकि विपक्षी सदस्यों ने अदाणी समूह के विरुद्ध करप्शन के आरोपों और यूपी के संभल में अत्याचार सहित कई मुद्दों पर हंगामा किया. सपा ने मंगलवार को शून्यकाल (सुबह के सत्र) के दौरान सदन से बहिर्गमन किया.

तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने भी कुछ देर के लिए सदन से बहिर्गमन किया. इससे पहले, सभापति जगदीप धनखड़ ने बोला कि उन्हें विभिन्न मुद्दों पर नियम 267 के अनुसार 42 नोटिस मिले हैं, जो संविधान को अपनाने की सदी की आखिरी तिमाही में अब तक की सबसे अधिक संख्या है. उन्होंने किसी भी नोटिस को स्वीकार नहीं किया.

धनखड़ ने कहा कि सांसदों में से एक ने नियम 267 के अनुसार एक से अधिक नोटिस दिए. उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि नियम 267 के नोटिस पर विचार करने से पहले ही एक सदस्य ने इसे सार्वजनिक कर दिया. सभापति ने इसे प्रावधानों की अवहेलना करार दिया और बोला कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है. उन्होंने बोला कि इस मामले को विभिन्न दलों के नेताओं के समक्ष उठाया जाएगा. उन्होंने सदस्यों से उच्चतम नैतिक मानकों को बनाए रखने का आग्रह किया.

बाद में, सदन ने शून्यकाल के उल्लेखों के साथ कार्यवाही प्रारम्भ की, जिनमें सभापीठ की पूर्व अनुमति से मामले उठाए जाते हैं. द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के एम मोहम्मद अब्दुल्ला और एमडीएमके के वाइको ने तमिलनाडु में फेंगल चक्रवात के कारण हुए हानि के मामले को उठाया. सपा (सपा) के रामगोपाल यादव ने यूपी के संभल में हाल ही में हुई अत्याचार का मामला उठाया.

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