राजकुमार की पारंपरिक धातु कारीगरी की हो रही सराहना
राजकुमार, पारंपरिक धातु काम में माहिर हैं. वह टिन की चादरों पर छेनी और हथौड़ी से निशान बनाकर कई तरह के मार्का तैयार करते हैं, जो घरों, खेती और छपाई के कामों में काम आते हैं। इन मार्कों की हर समय डिमांड बनी रहती है, चाहे मौसम कोई भी हो। हालांकि, पहले इनका इस्तेमाल अधिक होता था, लेकिन अब भी इनकी जरूरी किरदार बनी हुई है।

कड़ी मेहनत से मिल रहा लाभ
लोकल 18 से वार्ता में राजकुमार ने कहा कि उनका यह व्यवसाय पूर्वजों से चला आ रहा है और उन्होंने इसे अपनी पूरी मेहनत और सरेंडर से आगे बढ़ाया है। महंगाई और आधुनिकता के इस दौर में, जहां लोग शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, वह ग्रामीण क्षेत्र में अपने परिवार के साथ इस कारीगरी को जारी रखे हुए हैं। फर्रुखाबाद के नेकपुर मशेनी गांव के निवासी राजकुमार अपने घर में ही यह पारंपरिक सामान तैयार करते हैं, जो के तरह के कामों में इस्तेमाल होते हैं।
खेतों और छपाई में इस्तेमाल होने वाले मार्के
यह कारीगर खेतों में फसलों के पैकेट पर नाम, किस्म, लॉट नाम और पहचान चिन्ह बनाने के लिए इन टिन की चादरों पर सुंदर चित्र उकेरते हैं। इसके अलावा, वह संबंधित फार्म का नाम भी अंकित करते हैं। इन सामानों की डिमांड हमेशा बनी रहती है, और राजकुमार प्रत्येक दिन 20 से 25 पीस मार्का तैयार कर बाजार में बेचते हैं। इनकी मूल्य आमतौर पर 50 रुपये तक होती है।
पारंपरिक ढंग से तैयार होते हैं ये सामान
राजकुमार के द्वारा तैयार किए गए इन मार्कों को बनाने की प्रक्रिया बहुत खास है। पहले टिन की चादर को समतल किया जाता है, फिर उसे साइज में काटकर गोल या चौकोर आकार में बदला जाता है। उसके बाद लगातार हथौड़े की चोटों से उसे आकार दिया जाता है। फिर इस पर लकड़ी का हैंडल लगाया जाता है और यह छपाई के लिए तैयार हो जाता है।
राजकुमार की मेहनत और पारंपरिक कारीगरी की प्रशंसा हर स्थान हो रही है, और वह आधुनिकता के इस दौर में भी अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक चला रहे हैं।

