उत्तर प्रदेश

वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ विरोध हुआ तेज

वक्फ संशोधन विधेयक के विरुद्ध विरोध तेज होता जा रहा है. जमीयत उलमा-ए-हिंद ने इस कानून को न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय किया है. संगठन के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा-अगर ये विधेयक कानून बनता है, तो जमीयत की सभी प्रांतीय इकाइयां अपने-अपने राज्यों के

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जंतर-मंतर पर 13 मार्च को बड़ा प्रदर्शन 13 मार्च को ऑल इण्डिया मुसलमान पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य मिल्ली संगठनों द्वारा जंतर-मंतर पर बड़े विरोध प्रदर्शन करेगा. जिसे जमीयत उलमा-ए-हिंद ने अपना समर्थन दिया है. मौलाना अरशद मदनी ने कहा-मुसलमानों को विवश होकर अपने अधिकारों की बहाली के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है. पिछले 12 सालों से संयम और धैर्य रखने के बावजूद, जबरन गैरकानूनी कानून लाने की प्रयास की जा रही है. उन्होंने बोला कि जब इन्साफ के सभी दरवाजे बंद हो जाते हैं, तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचता.

‘वक्फ कानून धार्मिक मामला, सरकारी दखल बर्दाश्त नहीं’ मौलाना मदनी ने कहा-वक्फ पूरी तरह से एक धार्मिक मुद्दा है और इसमें किसी भी सरकारी दखल को स्वीकार नहीं किया जाएगा. वक्फ संपत्तियां वे दान हैं, जो बुजुर्गों ने कौम की भलाई के लिए वक्फ की हैं. उन्होंने इल्जाम लगाया कि गवर्नमेंट ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को दिखावे के लिए विधेयक भेजा, लेकिन विपक्ष की सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने दावा किया कि विधेयक में चालाकी से ऐसी धाराएं जोड़ी गई हैं, जिनसे वक्फ संपत्तियों पर गवर्नमेंट का कब्जा आसान हो जाएगा.

‘संवैधानिक अधिकारों का हनन’ मौलाना मदनी ने बोला कि मुस्लिम ऐसा कोई कानून स्वीकार नहीं कर सकते, जो शरीयत के विरुद्ध हो. उन्होंने बोला कि यह मुसलमानों के अस्तित्व का नहीं, बल्कि उनके कानूनी अधिकारों का प्रश्न है. मौजूदा गवर्नमेंट नए कानून के जरिए मुसलमानों से वे अधिकार छीनना चाहती है, जो उन्हें संविधान ने दिए हैं.

‘सेक्युलर पार्टियां भी दोषी’ मौलाना मदनी ने स्वयं को सेक्युलर कहने वाली उन पार्टियों पर भी निशाना साधा, जिन्होंने इस विधेयक का विरोध नहीं किया. उन्होंने बोला कि इन पार्टियों ने सत्ता के लालच में इस बिल को खुला समर्थन दिया, जो मुसलमानों के साथ विश्वासघात है. उन्होंने इल्जाम लगाया कि ये पार्टियां सांप्रदायिक ताकतों से अधिक घातक हैं, क्योंकि ये मित्र बनकर पीठ में छुरा घोंप रही हैं.

‘संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष’

मौलाना मदनी ने कहा-ये लड़ाई हिंदू और मुस्लिम के बीच नहीं, बल्कि सांप्रदायिकता और सेक्युलरिज्म के बीच है. उन्होंने बोला कि राष्ट्र की बहुसंख्यक जनसंख्या सांप्रदायिकता के विरुद्ध है और मुस्लिम भी कभी हालात के रहमो-करम पर नहीं रहे हैं. उन्होंने कहा, “हम अंग्रेजों के जुल्म के आगे नहीं झुके, तो अब हमें कोई ताकत नहीं झुका सकती. मुस्लिम केवल एक अल्लाह के सामने सिर झुकाता है.

बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील मौलाना मदनी ने सभी न्यायप्रिय नागरिकों से 13 मार्च को होने वाले विरोध प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की. उन्होंने बोला कि यह सिर्फ़ मुसलमानों का नहीं, बल्कि राष्ट्र के संविधान और कानून का भी मामला है. उन्होंने बोला कि गवर्नमेंट को यह साफ संदेश देना होगा कि संसद में बहुमत का अर्थ यह नहीं कि किसी समुदाय के कानूनी अधिकारों को समाप्त कर दिया जाए.

‘अदालतों में इन्साफ की उम्मीद’ मौलाना मदनी ने बोला कि जमीयत उलमा-ए-हिंद कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी और सभी लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों का इस्तेमाल करेगी. उन्होंने बोला कि हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और हमें आशा है कि इन्साफ अवश्य मिलेगा.

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