जूना अखाड़ा से जुड़े संतों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ भूख हड़ताल की शुरू
पीलीभीत के दियोरिया थाना क्षेत्र स्थित सखियां बाबा मेला स्थल पर रविवार को टकराव खड़ा हो गया. जूना अखाड़ा से जुड़े संतों ने पुलिस प्रशासन पर श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार और लाठीचार्ज का इल्जाम लगाते हुए भूख स्ट्राइक प्रारम्भ कर दी है. संतों का बोलना है कि जब तक गुनेहगार प्रशासनिक ऑफिसरों और क्षेत्रीय लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे स्ट्राइक जारी रखेंगे.

जूना अखाड़ा के अध्यक्ष महंत सत्यगिरी ने प्रशासन पर प्रश्न उठाते हुए बोला कि गैरकानूनी दुकानें हटवाना ठीक था, लेकिन पिछले तीन महीनों से यहां जो धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ था, उसकी प्रबंध प्रशासन स्वयं देख रहा था. उन्होंने इल्जाम लगाया कि इस दौरान किसी भी गैरकानूनी कमाई या अनियमितता पर कार्रवाई नहीं की गई. संतों द्वारा गैरकानूनी उगाही का विरोध करने पर प्रशासन ने दुकानें हटवाने के साथ ही श्रद्धालुओं को जबरन हटाया और उन पर लाठीचार्ज किया.
महंत सत्यगिरी के अनुसार, यह जगह श्रद्धा और विश्वास का केंद्र है, जहां गांव के एक आदमी द्वारा लगातार धन उगाही की जा रही थी. संतों ने इसे रोकने के लिए प्रशासन से बार-बार गुहार लगाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसी के विरोध में अब दर्जनों संत दियोरिया थाना परिसर के बाहर भूख स्ट्राइक पर बैठे हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों के विरुद्ध जांच कर कार्रवाई नहीं की जाती, वे धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे.
सखियां बाबा जगह पर एक प्राचीन पीपल का पेड़ है, जिससे श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी है. लोगों का मानना है कि इस पेड़ के चक्कर लगाने से गंभीर बीमारियां दूर हो जाती हैं. पिछले तीन महीनों से यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे थे, जिसके कारण एक छोटे मेले जैसा माहौल बन गया था. अब इस टकराव ने धार्मिक माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है.
दियोरिया कला थाना प्रभारी दिगम्बर सिंह ने बल प्रयोग के आरोपों को गलत कहा है. उन्होंने बोला कि संतों ने स्वयं गैरकानूनी मेले की कम्पलेन की थी, जिसके बाद मेला हटवा दिया गया है.

