पहचान पत्र के नाम पर बुर्का हटाने की मांग पर छिड़ी घमासान, सपा है नाराज
उत्तर प्रदेश में आनें वाले चुनावों के बीच सपा ने निर्वाचन आयोग के एक आदेश पर कठोर विरोध जताई है. पार्टी ने बुर्का पहनने वाली स्त्रियों की मतदान केंद्रों पर पहचान जांच के निर्देश को नियमों के विरुद्ध बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है. समाजवादी पार्टी ने मांग की है कि इस आदेश को तुरंत खारिज किया जाए और सभी मतदाताओं की पहचान वोटर आईडी कार्ड से ही की जाए. पार्टी का इल्जाम है कि यह निर्णय एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला और पूरी तरह अलोकतांत्रिक है.

सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने पत्र में साफ बोला है कि निर्वाचन आयोग का यह नया निर्देश आयोग के ही स्थापित नियमों का उल्लंघन करता है. उन्होंने लिखा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा जारी यह आदेश निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्न खड़ा करता है. बुर्का या पर्दा पहनने वाली स्त्रियों से उनके चेहरे का मिलान कराने का निर्देश गैरकानूनी है, जो एक खास धार्मिक समुदाय की स्त्रियों को भयभीत करने का काम करेगा.” पाल ने आगे मांग की कि पहचान सत्यापन का काम सिर्फ़ पोलिंग बूथ के अधिकारी ही करें, न कि पुलिसकर्मी.
आदेश लोकतंत्र की जड़ें कमजोर करता है
पार्टी के अनुसार, हाल के लोकसभा चुनावों में इसी तरह की जांच के कारण कई मुसलमान महिलाएं मतदान केंद्रों पर पहुंचीं तो डर गईं और बिना वोट डाले लौट गईं. इससे वोटिंग फीसदी पर बुरा असर पड़ा. समाजवादी पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “यह आदेश लोकतंत्र की जड़ें कमजोर करता है. सभी मतदाताओं को समान अधिकार मिलना चाहिए. बुर्कानशीं स्त्रियों को अलग से निशाना बनाना संविधान के मूल सिद्धांतों का अपमान है. हम आयोग से अपील करते हैं कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं या स्त्री ऑफिसरों की सहायता से ही पहचान हो, लेकिन जबरन बुर्का हटाने जैसी कोई कार्रवाई न हो.”
फर्जी वोटिंग रोकने के लिए सत्यापन अनिवार्य
निर्वाचन आयोग ने अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, आयोग ने पहले ही साफ किया है कि बुर्कानशीं स्त्रियों की जांच स्त्री ऑफिसरों या आंगनवाड़ी सेविकाओं की मौजूदगी में ही होगी. आयोग का बोलना है कि मतदाता सूची में नाम और वोटर आईडी के आधार पर ही पहचान होगी, लेकिन फर्जी वोटिंग रोकने के लिए सत्यापन जरूरी है.

