उत्तर प्रदेश

संभल हिंसा मामले में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क की याचिका पर होगी सुनवाई

 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय में संभल अत्याचार मुद्दे में समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क की याचिका पर आज सुनवाई होगी. न्यायमूर्ति समीर जैन ने 8 अगस्त को MP-MLA न्यायालय की कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई थी.

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मामला संभल की शाही जामा मस्जिद बनाम श्रीहरिहर मंदिर सर्वे से जुड़ा है. 24 नवंबर 2024 को सर्वे के दौरान हुई अत्याचार में चार लोगों की मृत्यु हुई थी. चंदौसी एमपी-एमएलए न्यायालय में चार्जशीट दाखिल होने के बाद समाजवादी पार्टी सांसद समेत चार को सम्मन जारी हुआ था. तीन के विरुद्ध बेल वारंट और 15 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे.

सांसद बर्क ने 18 जून 2025 को दाखिल चार्जशीट को चुनौती दी है. उन्होंने लंबित मुकदमे की कार्रवाई रद्द करने की मांग की है. याचिका में राज्य गवर्नमेंट और एसआई दीपक राठी को प्रतिवादी बनाया गया है. सांसद के वकील फरीद अहमद का बोलना है कि पुलिस ने जांच में कुछ लोगों के नाम हटा दिए हैं. उनका दावा है कि अत्याचार के दिन सांसद संभल में उपस्थित नहीं थे. सांसद ने 22 नवंबर को सिर्फ़ जनता को समझाने का बयान दिया था.

19 नवंबर को हिंदू पक्ष ने चंदौसी न्यायालय में दावा किया था कि शाही जामा मस्जिद श्री हरिहर मंदिर है. उसी दिन शाम को मस्जिद का पहला सर्वे हुआ. 24 नवंबर को दूसरे सर्वे के दौरान भीड़ ने पुलिस पर पथराव और फायरिंग की. इस अत्याचार में कई गाड़ियां फूंक दी गईं. पुलिस ने 96 अभियुक्तों को कारावास भेजा है, जिनमें तीन हत्यारोपी, तीन महिलाएं और मस्जिद सदर जफर अली एडवोकेट शामिल हैं.

सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और समाजवादी पार्टी विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित 40 लोगों के विरुद्ध नाम से केस दर्ज किया था, जबकि 2750 अज्ञात के विरुद्ध FIR दर्ज़ हुई. बीती 18 जून को SIT ने लगभग 1128 पन्नों में सांसद बर्क सहित 23 लोगों के विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की, हालांकि समाजवादी पार्टी विधायक पुत्र सुहैल इकबाल का नाम चार्जशीट में नहीं है.

सपा सांसद, विधायक इक़बाल महमूद के पुत्र सुहैल इक़बाल सहित अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, 23 मार्च 2025 को इसी मुकदमे में जामा मस्जिद के सदर जफर अली को अरैस्ट कर कारावास भेज दिया 24 जुलाई को उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद मुरादाबाद कारावास में 131 दिन बंद रहने के बाद 1 अगस्त को रिहाई हुई.

 

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