सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी कॉरिडोर मामले में मंदिर कमेटी से किये तीखे सवाल
बांके बिहारी कॉरिडोर मुद्दे में आज उच्चतम न्यायालय में सुनवाई है. इससे पहले मंगलवार को हुई सुनवाई में गवर्नमेंट के वकील ने कहा- हमारी मंशा मंदिर कब्जाने और धन हड़पने की नहीं है. हमारी मंशा है कि वहां बेहतर प्रबंधन कर भीड़ को मैनेज किया जाए. इस पर याचिकाकर्त
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सोमवार को भी सुनवाई हुई थी. उच्चतम न्यायालय ने बांके बिहारी कॉरिडोर मुद्दे में मंदिर कमेटी से तीखे प्रश्न किए थे. न्यायालय ने पूछा- मंदिर निजी हो सकता है, लेकिन देवता सबके हैं. वहां लाखों श्रद्धालु आते हैं. मंदिर का फंड श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े विकास में क्यों नहीं इस्तेमाल हो सकता? आप क्यों चाहते हैं कि सारा फंड आपके पॉकेट में ही जाए? उच्चतम न्यायालय में जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच सुनवाई कर रही थी.
याचिकाकर्ता के वकील के स्टेटमेंट पर न्यायालय की कठोर टिप्पणी कमेटी ने 15 मई को आए उच्चतम न्यायालय के उस निर्णय का भी विरोध किया, जिसमें राज्य गवर्नमेंट को बांके बिहारी कॉरिडोर बनाने के लिए मंदिर के फंड के इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी.
कोर्ट के कठोर प्रश्नों के उत्तर में याचिकाकर्ता के वकील श्याम दीवान ने कहा- असल बात यह है कि हमें सुने बिना ऐसा आदेश उच्चतम न्यायालय से कैसे आया? जबकि मुद्दा कुछ और था, उसमें अचानक आदेश आ गया कि मंदिर का फंड कॉरिडोर बनाने के लिए लिया जाए. इससे असहमति जताते हुए बोला कि किसी स्थान का विकास गवर्नमेंट की जिम्मेदारी है. यदि उसे भूमि अधिग्रहण करना तो वह अपने पैसों से कर सकती है.
अब पढ़िए वो दलील जिसको लेकर न्यायालय ने तीखे प्रश्न पूछे…
याचिकाकर्ता की तरफ से वकील श्याम दीवान ने न्यायालय में बोला कि बांके बिहारी मंदिर एक निजी मंदिर है. उसमें धार्मिक गतिविधियों और मैनेजमेंट को लेकर 2 गुटों में टकराव था. राज्य गवर्नमेंट ने बिना अधिकार उसमें दखल दिया.मामले को उच्चतम न्यायालय में ले आई और कॉरिडोर के लिए मंदिर के फंड के इस्तेमाल का आदेश ले लिया.
इसके बाद जल्दी-जल्दी एक अध्यादेश भी जारी कर दिया. इसका रिज़ल्ट यह हुआ कि मंदिर की स्थापना करने वाले और सदियों से उसे संभाल रहे गोस्वामी प्रबंधन से बाहर हो गए. इसी पर न्यायालय ने नाराजगी दिखाते हुए कठोर टिप्पणी की.
15 मई का आदेश वापस ले सकता है कोर्ट उच्चतम न्यायालय में लगभग 50 मिनट चली सुनवाई के बाद जजों ने इस बात का संकेत दिया कि 15 मई को उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट के बनाए अध्यादेश के फेवर में दिए गए आदेश को वापस लिया जा सकता है. फिलहाल मंदिर प्रबंधन के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायधीश की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जा सकती है. इसमें जिलाधिकारी को भी रखा जाएगा.
बांके बिहारी क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया की भी उसके इर्द-गिर्द के विकास में सहायता ली जाएगी. न्यायालय ने बोला कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए. इसके लिए उचित सुविधाओं का विकास महत्वपूर्ण है.
सुप्रीम न्यायालय के 15 मई को कॉरिडोर बनाने की स्वीकृति दी थी. इसके साथ ही बांके बिहारी मंदिर के खजाने से कॉरिडोर बनाए जाने का रास्ता भी साफ हो गया था. न्यायालय ने उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट को मंदिर के 500 करोड़ रुपए से कॉरिडोर के लिए मंदिर के पास 5 एकड़ जमीन अधिगृहीत करने की इजाजत दी थी. शर्त रखी थी कि अधिगृहीत भूमि भगवान के नाम पर दर्ज़ होगी. उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को भी संशोधित किया.
हाईकोर्ट ने मंदिर के आसपास की भूमि को सरकारी धन का इस्तेमाल करके खरीदने पर रोक लगा दी थी. जिसके बाद बांके बिहारी कॉरिडोर को लेकर उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उच्चतम न्यायालय में ईश्वर चंद्र शर्मा ने याचिका दाखिल की थी. इसमें दो मामले रखे गए थे. पहला- रिसीवर को लेकर, दूसरा- कॉरिडोर निर्माण को लेकर. इन दोनों मुद्दों पर 15 मई को उच्चतम न्यायालय ने आदेश जारी किया था.
मंदिर के खजाने से खरीदी जाएगी कॉरिडोर के लिए जमीन बांके बिहारी कॉरिडोर बनाने के लिए प्रदेश गवर्नमेंट मंदिर के खजाने की राशि से कॉरिडोर के लिए जमीन खरीदना चाहती थी. लेकिन, इसका मंदिर के गोस्वामियों ने विरोध किया और मुद्दा हाइकोर्ट पहुंच गया.
हाइकोर्ट ने मंदिर के खजाने की राशि के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. इसके बाद याचिकाकर्ता ईश्वर चंद्र शर्मा उच्चतम न्यायालय पहुंचे और कॉरिडोर को लेकर याचिका दाखिल की.
सुप्रीम न्यायालय ने दिए आदेश में बोला कि मंदिर के खजाने से कॉरिडोर की जमीन खरीदने के लिए पैसा लिया जा सकेगा. गवर्नमेंट को जमीन मंदिर के नाम लेनी होगी. उच्चतम न्यायालय के एडवोकेट सार्थक चतुर्वेदी ने कहा कि गवर्नमेंट केवल जमीन खरीदने के लिए बांके बिहारी मंदिर के खजाने से पैसा ले सकती है.
500 करोड़ रुपए से बनेगा कॉरिडोर बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर बनाने के लिए 500 करोड़ रुपए खर्च होगा. यह खर्च भूमि अधिग्रहण के लिए किया जाएगा. बांके बिहारी मंदिर के खजाने में करीब 450 करोड़ रुपए हैं. इसी रकम से कॉरिडोर के लिए जमीन खरीदी जाएगी. इस जमीन को अधिगृहीत करने में जिनके मकान और दुकान आएंगे, उन्हें मुआवजा दिया जाएगा.
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