शिक्षक को छेड़छाड़ और धर्मांतरण के केस में सम्मानजनक किया गया बरी, साक्ष्य के अभाव में मिली राहत
अमरोहा के एक इंटर कॉलेज में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ और धर्म बदलाव का दबाव बनाने के इल्जाम में घिरे शिक्षक को पॉक्सो एक्ट न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है. यह मुद्दा मंडी धनौरा क्षेत्र के एक इंटर कॉलेज से जुड़ा था, जहां गणित के प्रवक्ता शाहिद पर इल्जाम लगे थे. न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में शिक्षक को बरी किया.

संभल जिले के नंदपुर बीटा निवासी शाहिद पर कक्षा नौ की एक छात्रा ने गंभीर इल्जाम लगाए थे. छात्रा का इल्जाम था कि शिक्षक ने क्लास में उससे प्रेम का इजहार किया. छात्रा ने यह बात अपने परिजनों को बताई, जिसके बाद परिजनों ने इल्जाम लगाया कि शिक्षक ने छात्रा पर विवाह करने का दबाव बनाया. बाद में एक अन्य छात्रा ने भी शिक्षक पर ऐसे ही इल्जाम लगाए थे.
छात्रा की कम्पलेन पर बीते वर्ष 20 नवंबर को परिजनों ने कॉलेज में जमकर हंगामा किया था. जानकारी मिलने पर बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और विश्व हिंदू महासंघ के कार्यकर्ता भी कॉलेज पहुंच गए थे. हंगामे के दौरान कॉलेज की छुट्टी कर दी गई.
भीड़ ने कॉलेज की दीवार कूदकर भागने की प्रयास कर रहे शिक्षक शाहिद को घेर लिया था, जिसके बाद पुलिस ने कड़ी मशक्कत से उन्हें हिरासत में लिया और अरैस्ट कर कारावास भेज दिया. कॉलेज प्रबंधन ने भी शिक्षक को निलंबित कर दिया था.
छात्रा के पिता ने शिक्षक शाहिद के विरुद्ध नाबालिग बेटी को एक लाख रुपए का प्रलोभन देकर धर्म बदलाव का दबाव बनाने, छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट के अनुसार केस दर्ज कराया था. पुलिस ने शिक्षक को न्यायालय में पेश किया था.
मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो एक्ट प्रथम की न्यायालय में चल रही थी. न्यायालय ने अंतिम सुनवाई के बाद साक्ष्य के अभाव में शिक्षक शाहिद को दोषमुक्त करार दिया. न्यायालय ने वादी के विरुद्ध मानहानि का केस चलाने के लिए भी स्वतंत्र किया है.

