जनता ने सीएम योगी के सामने किए सवाल- घर गिरने के बाद कहाँ जाएंगे हम…
यूपी में योगी आदित्यनाथ ने पब्लिक की डिमांड पर कई बड़े निर्णय किए. लखनऊ में नदी के फ्लड जोन में बने मकानों पर बुलडोजर नहीं चलेगा क्योंकि जिस जमीन पर मकान बने हैं, उनकी रजिस्ट्री लोगों के पास हैं, म्यूटेशन है, बिजली के कनेक्शन हैं, हाउस टैक्स जमा है. अब गवर्नमेंट इस बात की जांच कराएगी कि नदी के फ्लड जोन में घर बने कैसे? जमीन बिकी कैसे? कौन से अधिकारी इसके लिए गुनेहगार हैं? असल में लखनऊ के कुछ इलाकों के लोगों में बुलडोजर चलने के डर से जबरदस्त टेंशन थी. कुकरैल नहर के आसपास बसे कुछ इलाकों के घरों में मार्किंग कर दी गई थी जबकि लोगों के पास अपनी जमीन के कानूनी कागजात थे. सरकारी बिजली, पानी और सीवर का कनेक्शन था लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही थी. क्षेत्र के लोग प्रदर्शन कर रहे थे. मंगलवार को योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के पंतनगर, खुर्रमनगर, अबरार नगर, रहीम नगर और इंद्रप्रस्थ नगर के लोगों को वार्ता के लिए बुलाया, अफसरों को सामने बैठाया. लोगों ने कहा कि अधिकारी कह रहे हैं कि कुकरैल नहर के आसपास के इन इलाकों के करीब 2 हजार मकान फ्लड प्लेन जोन में हैं, इन घरों पर बुलडोजर चलेगा, कई मकानों की मार्किंग की गई है. इन लोगों ने योगी को कहा कि उन्होंने प्राइवेट जमीन खरीदी, रजिस्ट्री करवाई, नक्शा पास करवाया, हाउस टैक्स जमा किया और अब 20-20 वर्ष के बाद अचानक उनके घर को गैरकानूनी कहा जा रहा है, वो कहां जाएं?

लोगों की बात सुनने के बाद योगी ने ऑन द स्पॉट ही लोगों की परेशानी का निराकरण कर दिया. सामने बैठे अफसरों से बोला कि यदि कागजात पक्के हैं, वैध हैं, तो फिर घरों पर लाल निशान किसके आदेश पर लगाए गए? घर पर बुलडोजर चलाने की बात किसके आदेश पर कही? योगी ने लोगों से बोला कि किसी के घर पर बुलडोजर नहीं चलेगा, पंतनगर हो या इंद्रप्रस्थ नगर, हर निवासी की सुरक्षा और संतुष्टि गवर्नमेंट की जिम्मेदारी है. योगी ने बोला कि जिन अफसरों की वजह से लोग परेशान हुए, उनमे भ्रम फैला, भय फैली, उनकी ज़िम्मेदारी तय की जाएगी. योगी ने बोला कि जो लाल निशान घरों पर लगाए गए हैं, उन्हें भी मिटाया जाएगा. योगी ने प्रभावित परिवारों से बोला कि वो निश्चिंत और खुश होकर घर जाएं. जैसे ही ये समाचार इन मोहल्लों में पहुंची तो वहां भी उत्सव प्रारम्भ हो गया, आतिशबाजी हुई, मिठाइयां बंटी. कुकरैल के किनारे बसे इन इलाकों के निवासियों की सांसें पिछले एक महीने से अटकी हुई थीं. इनके घर पर बुलडोजर चलने की नौबत क्यों आई? ये भी समझ लीजिए. असल में सिंचाई विभाग ने 14 जून को एक रिपोर्ट दी. इसके अनुसार 28 किलोमीटर लंबी कुकरैल नदी के दोनों किनारों के 50-50 मीटर क्षेत्र को फ्लड प्लेन जोन घोषित किया गया है. अबरार नगर, पंत नगर, रहीम नगर और इंद्रप्रस्थ नगर के सैकड़ों मकान फ्लड प्लेन ज़ोन के दायरे में हैं.
इस रिपोर्ट के बाद करीब दो हजार घरों पर लाल निशान लगा दिए गए. लोगों ने इसका विरोध किया. जमीन के कागजात अपने अपने घरों के बाहर चिपका दिए. लोगों ने बोला कि उन्होंने जमीन किसानों से 25 वर्ष पहले खरीदी है, सरकारी रिकॉर्ड देखकर खरीदी लेकिन सिंचाई विभाग कह रहा है कि यहां 1983 से कब्जा है. तो प्रश्न ये है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी अब तक कहां सो रहे थे? बुलडोजर चलाने की नौबत क्यों आई? ये सब कुछ बेलगाम अफसरों की गलती के नतीजे हैं. वैसे उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने सरकारी जमीनों पर कब्जे हटाने के लिए बुलडोजर चलाने की छूट दी, माफिया गुंडों की संपत्ति पर बुलडोजर चलवाया. इसकी आड़ में कुछ अफसरों ने मनमाने ढंग से जनता को परेशान करना प्रारम्भ दिया. अब योगी ने ऐसे अफसरों पर लगाम कसने की आरंभ की है. ये अच्छी बात है. लोगों के ये प्रश्न सही हैं कि जब उन्होंने गवर्नमेंट को टैक्स देकर जमीन खरीदी, रजिस्ट्री करवाई, म्यूटेशन करवाया, तब सिंचाई विभाग के अधिकारी कहां सोते रहे? अफसरों की गलती की सजा आम लोगों को क्यों दी जाए? ये बात समझने में योगी को देर नहीं लगी. इसीलिए उन्होंने जो आदेश जारी किया है, उसमें साफ-साफ बोला है कि अफसरों की भी जिम्मेदारी तय होगी और उन अफसरों के विरुद्ध कार्रवाई होगी, जिन्होंने लोगों के घरों पर लाल निशान लगाए, लोगों को डराया.
ये निर्णय इसलिए हो पाया क्योंकि योगी ने सीधे लोगों से बात की, न नेताओं की सुनी, न अफसरों की. सीधा संवाद का यही लाभ होता है. इसका लाभ आंदोलन कर रहे उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों को भी मिला. प्राथमिक विद्यालयों में फिलहाल औनलाइन अटेंडेंस लागू करने का आदेश वापस ले लिया गया. शिक्षक संघ के नेताओं के साथ मुख्य सचिव की बैठक में ये निर्णय किया गया कि पहले शिक्षकों से बात की जाएगी, उनकी समस्याओं का निवारण होगा, उसके बाद औनलाइन अटेंडेंस पर निर्णय होगा. पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे सरकारी प्राइमरी विद्यालय के शिक्षकों की नाराजगी को देखते हुए योगी ने सोमवार रात को ही इस मुद्दे की पूरी जानकारी ली. ऑफिसरों से पूछा कि अचानक औनलाइन अटेंडेंस को लागू क्यों किया? शिक्षकों को नेताओं से बात क्यों नहीं की गई? इसका असर तुरंत दिखाई दिया. मंगलवार को मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने प्राइमरी शिक्षक संघ के नेताओं से मुलाकात की और निर्णय किया गया कि एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया जाएगा. कमेटी सभी जिलों में सरकारी शिक्षकों से बात करेगी, उनकी परेशानियों के समझने की प्रयास करेगी. सबकी बात सुनने के बाद ही औनलाइन अटेंडेंस पर कोई फाइनल निर्णय होगा. अगले दो महीने तक ये आदेश स्थगित रहेगा.
असल में ये मामला भी इसीलिए बड़ा हो गया क्योंकि अफसरों ने बिना सोचे-समझे, ज़मीनी वास्तविकता को जाने बगैर औनलाइन अटेंडेंस का आदेश जारी कर दिया. विद्यालयों में कनेक्टिविटी का इश्यू है, इंटरनैट कनेक्टिविटी नहीं हैं, टीचर्स की पढ़ाने के अतिरिक्त दूसरे सरकारी कामों में भी लगाया जाता है. कई बार सरकारी ऐप काम ही नहीं करता. ऐसे में शिक्षक औनलाइन अटेंडेंस कैसे भर सकते हैं? योगी के दखल के बाद जैसे ही मुख्य सचिव ने शिक्षक नेताओं से बात की, तो ग्राउंड रियलिटी समझ में आ गई और मसले के हल का रास्ता निकल आया. कुल मिलाकर मामला सीधे संवाद का है. गवर्नमेंट और जनता के बीच अधिकारी पुल का काम करते हैं. यदि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं तभी इस तरह की समस्याएं सामने आती हैं. इसीलिए अब योगी ने अफसरों पर कठोरता की है. इसका एक उदाहरण अलीगढ़ में भी मिला. यूपी गवर्नमेंट अब सरकारी जमीनों के पट्टों की जांच कराएगी. यदि गलत ढंग से पट्टे किए गए हैं तो ऐसा करने वाले अफसरों के विरुद्ध एक्शन होगा. इस मुद्दे में पहली गाज आईएएस अधिकारी देवी शरण उपाध्याय के ऊपर गिरी. अलीगढ़ में सरकारी जमीनों के पट्टों में गड़बड़ी के इल्जाम में देवी शरण उपाध्याय को सस्पेंड किया गया है. योगी आदित्यनाथ ने यूपी गवर्नमेंट के अफसरों को हिदायत दी है कि वो नियम कानून के दायरे में रहकर काम करें, जनता में भय और भ्रम फैलाने की प्रयास न करें. योगी ने ऑफिसरों से बोला है कि सरकारी जमीनों पर गैरकानूनी कब्जे हटाना महत्वपूर्ण है लेकिन यदि कहीं कोई बस्ती बसी है, जमीन के कागजात है, सरकारी नियमों के अनुसार जमीन खरीदी गई है, तो सीधे बुलडोजर लेकर पहुंचना ठीक नहीं हैं.

