ट्रेन के डिब्बों पर लिखे इन 5 डिजिट में छिपे हैं कई राज…
भारत में रहने वाले हर आदमी ने अपने जीवन में एक बार इंडियन रेलवे में यात्रा जरुर की होगी। उम्र के हर पड़ाव में एक बार आदमी ट्रेन में यात्रा जरुर करता है। ट्रेन में यात्रा करने के लिए ट्रेन नंबर बहुत जरुरी होता है। ट्रेन की बुकिंग करने से लेकर ट्रेन के बारे में जानकारी जुटाने के लिए भी इस नंबर की जरूरत पड़ती है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि ट्रेन नंबर भी एक खास प्रकार का कोड होता है।

ट्रेन के हर डिब्बे पर रेलवे एक 5 डिजिट का नंबर लिखती है। ये कोई रैंडम लिखे हुए नंबर नहीं होते हैं, बल्कि इनका एक खास मतलब होता है। यदि आपको इन नंबर का मतलब पता हो, तो आपको आपके ट्रेन के बारे में बहुत सी जानकारी मिल सकती है।
सुपर फास्ट का ये है कोड
झांसी रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि ट्रेन नंबर एक खास प्रकार का कोड होता है। उन्होंने कहा कि ट्रेन का पहला नंबर यदि 0 है तो वह कोई स्पेशल ट्रेन, जैसे समर स्पेशल, परीक्षा स्पेशल ट्रेन होगी, पहला नंबर यदि 1 या 2 है तो वह सुपर फास्ट एक्स्प्रेस या फिर एक्स्प्रेस ट्रेन होगी। नंबर 3 कोलकाता उपनगरीय रेलवे का कोड है। नंबर 5 पैसेंजर गाड़ियों का कोड है। नंबर 6 मेमू ट्रेन और नंबर 8 सुविधा एक्स्प्रेस ट्रेन का पहला नंबर होता है।
दूसरे डिजिट से मिलते है ये संकेत
मनोज कुमार सिंह ने कहा कि ट्रेन नंबर का दूसरा डिजिट यदि 1 है तो वह सेंट्रल रेलवे या वेस्टर्न सेंट्रल रेलवे की ट्रेन होगी। नंबर 2 राजधानी, शताब्दी, जन शताब्दी, गरीब रथ जैसी ट्रेनों का होता है। नंबर 3 ईस्टर्न रेलवे और ईस्टर्न सेंट्रल रेलवे से चलने वाली ट्रेन के लिए होता है। नंबर 4 नॉर्थन और नॉर्थन सेंट्रल रेलवे की ट्रेन के लिए इस्तेमाल होता है। इसी प्रकार भिन्न भिन्न जोन की ट्रेन के लिए अलग कोडिंग है।
ट्रेन नंबर में छुपे हैं कई राज
मनोज कुमार सिंह ने कहा कि ट्रेन नंबर के दूसरे और तीसरे डिजिट के कॉम्बिनेशन से यात्री यह पता लगा सकता है कि ट्रेन किस रेल मंडल से संचालित होती है। जैसे 21 या 22 कोड झांसी रेल मंडल से चलने वाली ट्रेन के नंबर में इस्तेमाल होता है। उदाहरण के लिए 12176 हावड़ा चंबल एक्सप्रेस झांसी रेल मंडल से संचालित होती है। ट्रेन नंबर के चौथे और पांचवें नंबर का इस्तेमाल रैंडम आधार पर किया जाता है। इससे ट्रेन को एक विशेष पहचान मिलती है।

