सरयू की अविरल जलधारा में होगा वाटर लाइटिंग,त्रेता युग जैसा होगा नजारा
अयोध्या : रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने की बेला आने वाली है। 22 जनवरी 2024 को 12:00 से 1:00 के बीच रामलला की प्राण प्रतिष्ठित निर्धारित है। लिहाजा 7 वां दीपोत्सव इस बार बहुत खास होने वाला है। इस बार जहां 21 लाख दीपक एक साथ जलाने का नया कीर्तिमान बनाने की तैयारी है तो सबसे खास होगी। इन दीपों के बीच दिखाई देने वाली मंदिर और श्री राम की आकृति। दीपो से बनी यह आकृति इस बार अदभुत होने वाली है। यही वह खास दृश्य होगा जिसे देखकर हर कोई वशीभूत हुए बिना नहीं रह सकेगा।
अयोध्या के 51 घाटों पर 21 लाख से अधिक दीए प्रज्ज्वलित कर नया विश्व कीर्तिमान बनाने की तैयारी है। एक साथ प्रज्वलित होने वाले दीपक गणना के समय 21 लाख से अधिक हो इसके लिए 24 लाख दीपक जलाए जाएंगे। इसमें लगभग 1 लाख लीटर सरसों के ऑयल का इस्तेमाल होगा। इन दीपकों को जलाने के लिए 25000 वॉलिंटियर लगाए जाएंगे। इन दीपकों के बीच फाइन आर्ट के विद्यार्थी राम जन्मभूमि मंदिर और श्री राम की आकृति डिजाइन तैयार करेंगे। इन्हीं डिजाइनों को दीपक से इस तरह सजाया जाएगा की दीपक जलने के बाद मंदिर और श्री राम दोनों दिखाई देंगे और यही सबसे बड़ा आकर्षण होने वाला है।

सरयू की अविरल जलधारा में वाटर लाइटिंग
इस बार के दीपोत्सव में विश्व की सबसे बड़े स्क्रीन पर लेजर शो का आयोजन किया जाएगा। पहली बार सरयू की अविरल जलधारा में वाटर लाइटिंग भी आकर्षण का केंद्र होगा। इसके अतिरिक्त कई राष्ट्रों की रामलीला का मंचन होगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, दीपोत्सव में ही प्राण प्रतिष्ठा की झलक दिखे इसको लेकर प्रशासनिक अमला भी तैयारी कर रहा है। इतना ही नहीं जिस तरह त्रेता युग में प्रभु राम लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे कुछ ऐसा ही नजर ईश्वर राम के भव्य महल में विराजमान होने के पहले सातवें दीपोत्सव में नजर आएगा।
दीपोत्सव की तैयारी लगभग पूरी
अयोध्या के जिला अधिकारी नीतीश कुमार के मुताबिक इस बार की दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए तैयारी लगभग पूरी कर दी गई है। इस बार के दीपोत्सव में सुन्दर का केंद्र होगा लेजर शो, जो विश्व स्तरीय होगा। इतना ही नहीं 21 लाख दीपक जलाने के लिए अवध यूनिवर्सिटी के 25000 वालंटियर लगाए जाएंगे। पूरी राम की नगरी को त्रेता युग की नगरी के तौर पर सजाया जा रहा है। सड़क चौराहे कुंड, मठ-मंदिर पर सुन्दर लाइट लगाई जा रही है।
त्रेता युग जैसा होगा नजारा
हनुमानगढ़ के महंत राजू दास बताते हैं कि जिस तरह त्रेता युग में लंका पर विजय प्राप्त कर प्रभु राम अयोध्या लौटे थे और अयोध्या वासियों ने दीप माला जलाकर उनका स्वागत किया था। कुछ ऐसा ही नजारा इन दोनों अयोध्या के सड़कों पर अयोध्या की गलियों में अयोध्या के मठ मंदिरों पर देखने को मिल रहा है।

