उत्तर प्रदेश

लखनऊ नगर निगम की सदन बैठक से पूर्व ही आपस में भिड़ गए ये 2 पक्ष

लखनऊ नगर निगम के सदन बैठक से एक दिन पहले बीजेपी पार्षद दल की हुई. महापौर के कैंप कार्यालय में हुई बैठक दो पक्षों में टकराव तक पहुंच गई. हालांकि,भाजपा नगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी की नाराजगी के बाद दोनों पक्षों में मान मनव्वल का कोशिश किया गया.

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नाराज पार्षदों ने उठाया मद निर्धारित करने का मुद्दा

भाजपा के नाराज पार्षदों ने महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी और मेयर सुषमा खर्कवाल के सामने पार्षद निधि के मदों को निर्धारित करने का मामला उठाया. अधिकांश पार्षद करीब 63 लाख रुपए बढ़ाई गई पार्षद निधि में विभिन्न विकास कार्य और महत्वपूर्ण खर्च के लिए निर्धारित किए गए मद के विरोध में है. इसी का मामला मीटिंग में गर्माया रहा, जिससे महापौर के करीबी पार्षदों और बजट में पार्षद निधि में मद निर्धारित करने के निर्णय का विरोध कर रहे पार्षदों में बहस हो गई. मुद्दा इतना बढ़ गया कि नौबत एक दूसरे को देख लेने तक बात तक आ गया. इसके बाद बीजेपी नगर अध्यक्ष ने कठोर रुख अपनाया, जिसके बाद दोनों पक्ष शांत हुए. हालांकि, घटना के बाद दोनों पक्ष के पार्षदों का बोलना है कि बात मुद्दों को लेकर है, पर्सनल स्तर पर किसी से कोई टकराव नहीं है.

मेयर बोली पार्षद स्वयं तय करेंगे निधि का खर्च

बैठक के बाद महापौर सुषमा खर्कवाल ने दैनिक भास्कर से वार्ता करते हुए कि नगर निगम में सभी तरह के विकास कार्य और जनसुविधा के काम महत्वपूर्ण हैं. इसलिए कई मदों में खर्च रखा गया है. उनका बोलना है कि अब पार्षद स्वयं निर्धारित करेंगे कि उनके वार्ड में कहां पर कितना खर्च किया जाएगा. बीजेपी पार्षद दल की बैठक में बैठे कई पार्षदों का बोलना है कि नौबत हाथापाई तक आ गई थी. बस ये समझ लीजिए कि हाथापाई नहीं हुई है. बाकी सब हो गया है. पर्सनल टिप्पणी के बीच टकराव बढ़ गया थ

पार्षद कहे कार्यकारिणी में निधि कम करने को लेकर नहीं हुई कोई बात

नाराज बीजेपी पार्षदों का बोलना है कि मेयर और नगर आयुक्त ने स्वयं की निधि कार्यकारिणी बैठक में कम करने की घोषणा की थी, लेकिन कार्यकारिणी की बैठक में इससे जुड़ा कोई निर्णय नहीं लिया गया था. अब पार्षदों का बोलना है कि यदि एक बार निधि कम करने का दावा किया जा चुका है तो उसकी यथा स्थिति बनी रहनी चाहिए. पार्षदों का बोलना है कि कार्यकारिणी बैठक में केवल सफाई का खर्च कम करने की बात कही गई थी. और संबंधित कंपनी को चौड़ी सड़क की सफाई देने पर सहमति बनी थी.

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