उत्तर प्रदेश

एसडीएम के पेशकार के लिए हाईकोर्ट की तरफ से आई ये अच्छी खबर

सुल्तानपुर के जयसिंहपुर एसडीएम न्यायालय के पेशकार समरजीत पाल को लखनऊ उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है. 5,000 रुपये की घूस मुद्दे में अरैस्ट पेशकार को न्यायालय ने जमानत दे दी है.

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आरोपी के वकील अश्विनी कुमार सिंह ने न्यायालय में बोला कि उनके मुवक्किल को झूठे मुद्दे में फंसाया गया है. उन्होंने तर्क दिया कि घूस का कोई ठोस सबूत नहीं है और धनराशि की बरामदगी मौके के बजाय थाने में हैंड वॉश के दौरान की गई. साथ ही, आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है.

दो नवंबर को हुई थी गिरफ्तारी मुद्दा 2 दिसंबर 2024 का है, जब अयोध्या एंटी भ्रष्टाचार टीम ने समरजीत पाल को तहसील के पास के मैदान से अरैस्ट किया था. यह कार्रवाई मोतिगरपुर के पारस पट्टी निवासी मोहर्रम अली की कम्पलेन पर की गई, जिन्होंने 24 नवंबर को कम्पलेन दर्ज कराई थी. कम्पलेन में उन्होंने कहा था कि उनके पिता की जमीन पर उनके चाचा अल्लादीन गैरकानूनी कब्जा कर निर्माण करवा रहे हैं.

एसडीएम को भी किया गया था सस्पेंड इस मुद्दे में जयसिंहपुर तहसील के एसडीएम संतोष कुमार ओझा को भी शासन ने निलंबित कर दिया है. पेशकार समरजीत पाल को पहले ही निलंबित किया जा चुका था. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने आरोपी को जमानत देने का फैसला लिया.

स्थगन आदेश के लिए दिया था प्रार्थना पत्र 22 नवंबर को मोहर्रम अली के पिता ने एसडीएम जयसिंहपुर को सरकारी बंटवारे और स्थगन आदेश के लिए प्रार्थना पत्र दिया था. लेकिन पेशकार समरजीत ने इसके बदले 25 हजार रुपये की मांग की. पहले पांच हजार तुरंत देने और बाकी पैसे बाद में देने की बात हुई. 28 नवंबर को मोहर्रम अली ने एंटी भ्रष्टाचार टीम को रिश्वतखोरी की सूचना दी. 29 नवंबर को जांच में इल्जाम ठीक पाए गए. इसके बाद एंटी भ्रष्टाचार टीम ने 2 दिसंबर को जाल बिछाकर पेशकार को अरैस्ट कर लिया.

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