आनंद विहार स्टेशन को टक्कर देगा ये स्थान
नई दिल्ली। कभी यह स्थान सराय हुआ करती थी, यानी लोग यहां पर आराम फरमाकर आगे जाते थे लेकिन अब यह राजधानी का ट्रांसपोर्ट का सबसे बड़ा हब बनने जा रहा है। यहां से देशभर के लिए ट्रेनें, कई राज्यों के लिए बसें, दिल्ली की लाइफ लाइन मेट्रो और राष्ट्र की पहली रैपिड रेल का यह पहला स्टेशन होगा। यानी रेल और रैपिड रेल दोनों एक साथ यहीं से चलेंगी।

यहां बात कर रहे हैं सराय काले खां की। यह स्थान इसलिए राजधानी का प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब बनेगा, क्योंकि दिल्ली से मेरठ तक दौड़ने वाली रैपिड रेल यहीं से प्रारम्भ होगी। इसके अतिरिक्त रेलवे स्टेशन से मध्य प्रदेश, गुजरात और दक्षिण हिंदुस्तान के लिए ट्रेनें यहीं से चलती हैं। कई राज्यों के लिए बसें यहीं से मिलती हैं और मेट्रो स्टेशन भी है। नयी दिल्ली स्टेशन में अंतरराज्जीय बस अड्डा और रैपिड रेल नहीं है। हालांकि आनंद विहार स्टेशन में ट्रांसपोर्ट ये सभी साधन होंगे, लेकिन रैपिड रेल यहां से गुजरेगी। पहला स्टेशन नहीं होगा। इस वजह से भविष्य में यह स्थान नयी दिल्ली और आनंद विहार को टक्कर देगा।
सराय काले खां का इतिहास
सराय का नाम सूफी संत काले खान के नाम पर रखा गया है। ये संत 14वीं -शताब्दी में शेरशाह सूरी के शासनकाल में थे। चांदनी चौक से करीब 32 किमी। दूर महारौली तक जाने आने के लिए यह स्थान शाही मार्ग पर था। निजामुद्दीन स्टेशन के पास रहने वाले बुजुर्ग भूपेन्द्र चौधरी बताते हैं कि गांव का नाम सराये काले खान हुआ करता था। इसमें ज्यादातर गुर्जर समाज के लोग रहते थे। बाद में दिल्ली के डेवलपमेंट के साथ गांव शहर में परिवर्तित हो गया। यही वजह है कि इतने परिवर्तन के बाद भी इस क्षेत्र को सराय काले खां ही बोला जाता है।
आरआरटीएस का सबसे बड़ा स्टेशन
यहां पर आरआरटीएस का सबसे बड़ा स्टेशन बन रहा है, जो 50,000 वर्ग मीटर से भी अधिक फैला होगा। यहां 4 ट्रैक और 5 प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं। सराय काले खां आरआरटीएस का सबसे जरूरी ट्रांसपोर्ट हब बनेगा।

