उत्तर प्रदेश

समर्थकों को इस बार जनता का वोट हासिल करने के लिए बहाना पड़ेगा ज्यादा पसीना

राष्ट्र में सबसे अधिक 80 लोकसभा सीटों वाले राज्य यूपी में इस चुनाव का महापर्व, तीज त्योहारों की सरगर्मियों और मौसम की तेज गर्मी के बीच सम्पन्न होगा. मौसम विभाग की मानें तो अप्रैल और मई के महीनों में पिछले कई बरसों के मुकाबले इस बार अधिक गर्मी पड़ेगी. अब लाख टके का प्रश्न है कि इस शिद्दत की गर्मी में चुनाव आयोग का प्रदेश में 70 फीसदी मतदान करवाने का मंसूबा कैसे पूरा होगा. 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश में 59.11 फीसदी मतदान हुआ था.

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उम्मीदवारों, सियासी दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों को इस बार जनता का वोट हासिल करने के लिए अधिक पसीना बहाना पड़ेगा. लू के थपेड़े झेलने होंगे. इसलिए माना यही जा रहा है कि इस बार का चुनावी अभियान सुबह जनसम्पर्क, दिन में गाड़ी रैली और शाम को चुनावी सभाओं का सिलसिला चलेगा. केन्द्रीय चुनाव आयोग ने मौसम के बदलने वाले मिजाज को देखते हुए पहले ही निर्देश जारी कर दिये हैं कि हर पोलिंग बूथ पर पेयजल, बिजली, शेड आदि की प्रबंध रहनी चाहिए.

आंचलिक मौसम विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक अप्रैल में दिन का तापमान 36 से 38 और मई माह में पारा 38 से 40 और कहीं-कहीं 40 डिग्री से भी ऊपर जा सकता है. जहां तक झुलसा देने वाली लू, तपन वाली ग्रीष्म लहर तब मानी जाती है जब दिन का तापमान सामान्य से साढ़े चार डिग्री अधिक या 40 से 45 डिग्री के बीच रिकार्ड हो. उन्होंने कहा कि अप्रैल के दूसरे पखवारे से गर्मी रफ्तार पकड़ेगी और जून के पहले हफ्ते तक यह चरम पर रहेगी. गौरतलब है कि प्रदेश में सातवें और आखिरी चरण का मतदान पहली जून को होगा और मतगणना चार जून को करवायी जाएगी.

पहले चरण में 30 मार्च से 18 अप्रैल के बीच पश्चिम और तराई की आठ सीटों पर चुनाव चलेगा, इस दौरान गर्मी रफ्तार पकड़ चुकी है. 19 अप्रैल को मतदान होगा. दोपहर में तेज धूप और तपिश के चलते मतदान केन्द्रों पर दोपहर में अपेक्षाकृत वोटरों की लाइनों कम ही लगने के आसार हैं. दूसरे चरण का मतदान 25 अप्रैल, तीसरे का सात मई, चौथे का 13 मई, पांचवे का 20 मई, छठे का 25 मई और सातवें का एक जून का मतदान होगा. मतदान की इन तारीखों में ग्रामीणों के मुकाबले पंखे, एसी और कूलर में दोपहरी गुजारने वाला शहरी वोटर कितना निकलेगा, यह देखने वाली बात होगी.

इन चुनावों के बीच °¹त्योहारों की भी सरगर्मी रहेगी. पुलिस प्रशासन के लिए चुनावी आचार संहिता का अनुपालन करवाने के साथ ही त्योहारों पर माहौल बिगड़ने न पाए इसके लिए खासी मशक्कत करनी होगी. चुनाव के दौरान होली और ईद दो बड़े त्योहार पड़ रहे हैं. इस बार पहली दफा अयोध्या में रामलला के नवनिर्मित मंदिर में रामनवमी भी मनाई जाएगी जिसमें बड़ी तादाद में रामभक्त उमड़ेंगे.

होली के रंगारंग त्योहार से ठीक पांच दिन पहले प्रदेश में प्रारम्भ हो रही चुनावी प्रक्रिया के दौरान होली के त्योहार के बाद इसी मार्च के अंत में गुड फ्राइडे और ईस्टर के त्योहार पड़ेंगे. इसके बाद फिर अप्रैल पहले पखवारे में ईद, दूसरे पखवारे में बैसाखी, आम्बेडकर जयंती, चैत रामनवमी के त्योहार पड़ेंगे.

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