उत्तर प्रदेश

इलाहाबाद HC के फैसले पर स्थायी नहीं है केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया

केंद्रीय स्त्री एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस निर्णय को ‘गलत’ करार दिया, जिसमें उसने बोला था कि सिर्फ़ स्तन पकड़ना और ‘पजामी’ का नाड़ा तोड़ना दुष्कर्म का क्राइम नहीं है. आज पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बोला कि वह इस निर्णय का समर्थन नहीं करती हैं और न्यायालय को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा, “मैं इस निर्णय का समर्थन नहीं करती हूं और न्यायालय को भी इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए क्योंकि इसका नागरिक समाज पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.

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इस फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने बोला कि यह बयान बहुत असंवेदनशील है और समाज के लिए बहुत ख़तरनाक है. उच्चतम न्यायालय को इस मुद्दे में हस्तक्षेप करना चाहिए. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यौन क्राइम के एक मुद्दे की सुनवाई करते हुए बोला है कि एक लड़की का निजी अंग पकड़ना और उसकी पायजामी का नाड़ा तोड़ना, आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) का मुद्दा नहीं है, बल्कि ऐसा क्राइम धारा 354 (बी) (किसी स्त्री को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला) के अनुसार क्राइम की श्रेणी में आता है.

यह आदेश दो व्यक्तियों द्वारा दाखिल एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा ने पारित किया. इन आरोपियों ने कासगंज के विशेष न्यायाधीश द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती देते हुए यह पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी. इस मुद्दे के तथ्यों के मुताबिक, विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) की न्यायालय में एक आवेदन दाखिल करके इल्जाम लगाया गया था कि 10 नवंबर, 2021 को शाम करीब पांच बजे शिकायतकर्ता स्त्री अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ ननद के घर से लौट रही थी. दाखिल आवेदन में इल्जाम लगाया गया था स्त्री के गांव के ही रहने वाले पवन, आकाश और अशोक रास्ते में उसे मिले और पूछा कि वह कहां से आ रही है.

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