यूपी: ठगों ने रिटायर्ड फौजी के खाते से उड़ाये लाखों रुपए
यूपी के कन्नौज जिले में साइबर ठगी का एक दंग कर देने वाला मुद्दा सामने आया है। मुद्दे को सुलझा तो लिया गया है लेकिन पुलिस भी दंग रह गई कि ऐसे भी लोगों से ठगी हो सकती है। दरअसल एक सेवानिवृत्त फौजी का मोबाइल खो गया। लेकिन ढिलाई के चलते उन्होंने नंबर ब्लॉक नहीं करवाया। लिहाजा उस नंबर को साइबर ठगों ने बड़े ही शातिराना ढंग से इस्तेमाल किया। उस नंबर से पेटीएम को एक्टिवेट किया गया। सेवानिवृत्त फौजी के खाते से वहीं मोबाइल नंबर लिंक था। जिसका लाभ उठाकर खाते से साइबर ठगों ने लाखों की धनराशि उड़ा दी।

अनिल कुमार के खाते से अज्ञात आदमी द्वारा UPI (पेटीएम) के माध्यम से कुल 4,13,000/- रुपये की ठगी की गई। जिसके सम्बन्ध में साइबर अपराध थाना जनपद कन्नौज में धारा 420 आइटी एक्ट के अनुसार मुद्दा दर्ज किया गया। साइबर अपराध थाना टीम द्वारा कार्यवाही करते हुए सम्बंधित बैंकों/इंटीमेडरी से वार्ता करते हुए अभियुक्त के खाते और उसके द्वारा दूसरे अपराधिक खातों जिनमें पीड़ित से साइबर फ्रॉड कर रकम भेजी गई थी।
पुलिस ने ऐसे सुलझाया मामला
साइबर अपराध थाना टीम के प्रयासों से बैंकों एवं मोबाइल कम्पनियों द्वारा मौजूद कराई गई जानकारी का गहन विश्लेषण किया गया। जिससे इस फ्रॉड में सम्मलित खाताधारकों और अभियुक्त के मध्य सम्बन्धों का भी सम्बन्धित थानों और क्षेत्रीय स्तर पर जानकारी करते हुए विश्लेषण किया गया तो पता चला कि पीड़ित अनिल कुमार जो आर्मी से सेवानिवृत्त हैं। इनके द्वारा जॉब के दौरान जो मोबाइल नम्बर प्रयोग कर रहे थे, सेवानिवृत्त होने के बाद उस मोबाइल नम्बर को उनके द्वारा बन्द कर दिया गया, परन्तु उक्त मोबाइल नम्बर जो फौजी के खाते से लिंक था उसको नहीं हटवाया गया, बाद में वह मोबाइल नम्बर अभियुक्त लालाराम को कम्पनी के द्वारा आवंटित कर दिया गया।
ऐसे ट्रांसफर हुआ पैसा
अभियुक्त लालाराम द्वारा आंवटित मोबाइल नम्बर (जिस पर पूर्व अनिल कुमार का खाता संचालित था) जिससे खाता से लिंक पेटीएम बनाया गया जिसके बाद अभियुक्त लालाराम द्वारा UPI (पेटीएम) के माध्यम से कुल 4,13,000/- रुपये की ठगी कर अपने मित्रों एवं रिशतेदारों के भिन्न-भिन्न खातों में गलत ढंग से स्थानांतरण किया गया है।
कैसे मिली सफलता
इस प्रकरण में साइबर अपराध थाना सी ओ कमलेश कुमार और टीम द्वारा अभियोग के मुख्य अभियुक्त लालाराम के ट्रेस होने पर साइबर अपराध टीम द्वारा अरैस्ट कर नियमानुसार विधिक कार्यवाही करते हुए इस सम्पूर्ण साइबर फ्रॉड का खुलासा किया गया। साइबर अपराध थाना प्रभारी और टीम द्वारा पीड़ित को अबतक कुल 2,10,624/- रुपये वापस कराया गया है। शेष रकम को वापस कराए जाने कि प्रकिया चल रही है।

