यूपी का लाल बनेगा इंडियन आर्मी का जाबांज अफसर
भारतीय सेना अकादमी से सेना प्रशिक्षण पूरा करके अधिकारी बनने वाला हर एक जेंटलमैन कैडेट मुश्किल परिश्रम और लगन के बूते सफलता की मिसाल पेश करता है. लेकिन, यहां अवॉर्ड पाने वालों की पहचान कुछ अलग होती है. अवॉर्ड पाते समय हजारों दर्शकों की मौजूदगी में नाम पुकारे जाते ही तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगती है. आईएमए की पीओपी में उत्तर प्रदेश के प्रवीण सिंह को स्वॉर्ड ऑफ ऑनर के साथ गोल्ड मेडल भी मिला. इसके बाद के तीन पदक उत्तराखंड की झोली में आए. आईएमए में शनिवार को आयोजित पासिंग आउट परेड में उत्तर प्रदेश के आगरा निवासी प्रवीण सिंह ने स्वार्ड ऑफ ऑनर हासिल किया. इसके बाद उन्होंने गोल्ड मेडल पर भी कब्जा जमाया. आईएमए के दो श्रेष्ठ खिताब पाने वाले प्रवीण सिंह के चेहरे पर अलग ही खुशी नजर आई.

प्रवीण ने कहा कि पिता व्यवसायी और मां गृहिणी हैं. प्रवीण की बचपन से सेना में जाने की रुचि थी. इसलिए कक्षा-छह में राष्ट्रीय मिलिस्ट्री विद्यालय धौलपुर में दाखिला ले लिया. वहां से पासआउट होने के बाद उनका एनडीए में चयन हुआ. एनडीए में तीन वर्ष के प्रशिक्षण के बाद एक वर्ष पहले वे आईएमए पहुंचे. छठवीं से सेना रीति-रिवाज के बीच पले-बढ़े प्रवीण ने अपनी योग्यता दिखाई. इसी बूते वे दो बड़े अवॉर्ड पाने में सफल हुए. प्रवीण सेना में तृतीय सिखलाई बटालियन में कमीशन हुए हैं.
देहरादून. श्रीनगर गढ़वाल निवासी विनय भंडारी ने तकनीकी ग्रेड में रजत पदक हासिल किया. विनय इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद तकनीकी ग्रेजुएट कोर्स के जरिए सेना में भर्ती हुए. एक वर्ष आईएमए में मुश्किल प्रशिक्षण के बाद वे शनिवार को पास आउट हुए.
देहरादून. भारतीय सेना अकादमी (आईएमए) से शनिवार को पास आउट होकर सेना में लेफ्टिनेंट बने भरकटिया पिथौरागढ़ के शौर्य भट्ट ने कांस्य पदक जीता. उन्होंने 12वीं के बाद एनडीए की परीक्षा पास की थी. एनडीए से पास आउट होने के बाद वह एक वर्ष के प्रशिक्षण के लिए आईएमए पहुंचे. यहां से शनिवार को पास आउट होकर वह इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट बन गए. शौर्य ने अपनी 12वीं की परीक्षा दिल्ली से पास की. उनकी मां शिक्षिका हैं. इससे पूरा परिवार बहुत खुश है.
मोहित कापड़ी सेना में
देहरादून. पिथौरागढ़ के सिराड़ गांव निवासी मोहित कापड़ी सेना में छह वर्ष बतौर सिपाही जॉब करने के बाद एसीसी विंग के जरिए आईएमए पहुंचे. शनिवार को पासआउट होकर अधिकारी बन गए. उन्होंने रजत पदक भी हासिल किया. मोहित ने सरस्वती शिशु मंदिर नैनीपातल से पांचवीं तक पढ़ाई की. इसके बाद आगरा केवि-दो से 12वीं तक की पढ़ाई की. इसके बाद वे 2014 में सेना में बतौर सिपाही भर्ती हो गए. उनको थ्री पैरा स्पेशल फोर्स में नियुक्ति मिली. इसी कोर से पिता बतौर जेसीओ रिटायर हुए थे. मोहित ने छह वर्ष की जॉब के बाद मुश्किल तैयारी की और 2020 में एसीसी की परीक्षा पास की. इसके बाद वे शनिवार को लेफ्टिनेंट बन गए. वे लद्दाख स्काउट में कमीशन हुए. लेह में पहली पोस्टिंग मिली. उनकी मां हेमा गृहिणी हैं और बड़े भाई राकेश निजी विद्यालय में शिक्षक हैं.

