शिलाजीत की असलियत जानने के लिए इन तरीकों का करें उपयोग
बहराइच: सर्दियों का मौसम आते ही उत्तर प्रदेश के भिन्न-भिन्न जिलों में नेपाल के लोग तरह-तरह की जड़ी बूटियां बेचते नजर आ जाते हैं। इन जड़ी -बूटियों में शिलाजीत, पहाड़ी धनिया, केसर , बिच्छू घास शामिल है। अब प्रश्न उठता है वास्तविक और नकली शिलाजीत की परख कैसे करें। शुद्ध शिलाजीत पहाड़ी इलाकों में मिलती है। इसे चट्टानों से निकाला जाता है। वास्तविक शिलाजीत काफी महंगी होता है, इसलिए बाजार में नकली शिलाजीत भी बेची जाती है। आपको जानकर आश्चर्य होगी कि बाजार की 99 फीसदी शिलाजीत मिलावटी हैं या फिर नकली हैं।

जानकार बताते हैं कि वास्तविक शिलाजीत को जलाकर माचिस की दो तीलियों से खींचने पर दो हाथों तक यह टूटता नहीं है। वास्तविक शिलाजीत की ये पहचान होती है और यदि टूट जाए तो शिलाजीत अच्छा नहीं माना जाता है। साथ ही वास्तविक शिलाजीत को चम्मच पर रखकर जलाएं। वास्तविक शिलाजीत बिना किसी धुएं के पूरी तरह जल जाएगी और बहुत कम राख बनेगी। वास्तविक शिलाजीत को शराब में डालकर जांच करें यदि वो वास्तविक होगी तो घुलेगी नहीं।
पहाड़ी धनिया भी कारगर
पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के लोग सर्दियों के मौसम में शिलाजीत के साथ और भी कई जड़ी बूटियां बेचते नजर आते हैं। इन जड़ी बूटियां में पहाड़ी धनिया भी होती है। बोला जाता है सर्दी खांसी में पहाड़ी धनिया बहुत कारगर होती है। यह धनिया काले कलर की होती है , इसके साथ ही पर्वत के नीचे की एक विशेष प्रकार की लकड़ी होती है जिसको भी यह घूम घूम कर बेचते हैं। इनका ऐसा मानना है चोट लगने पर पत्थर पर घिसकर इस लकड़ी का लेप लगा दिया जाए तो घाव शीघ्र भर जाता है।
ग्राहक पर निर्भर करती है कीमत
वैसे तो नेपाल के लोग ज्यादातर उत्तर प्रदेश में जड़ी-बूटियां बेचते हैं लेकिन बहुत सारे नेपाली ऐसे भी हैं जो उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त अन्य प्रदेशों में अपनी जड़ी बूटियां को बेचने जाते हैं। जैसे राजस्थान बिहार बंगाल। नेपाली लोग 4 महीने तक यह घूम-घूम कर भिन्न-भिन्न जिलों में जड़ी बूटियां की सेलिंग करते हैं। यदि वहीं मूल्य की बात करें तो इनकी कोई मूल्य फिक्स नहीं होती है। जिस तरह का ग्राहक होता है उसी हिसाब से पैसे ले लेते हैं।

