उत्तर प्रदेश

वी नारायण ने यूपी का सहयोग करने के लिए दिया ये बड़ा बयान

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) मौसम पूर्वानुमान, कृषि, आपदा प्रबंधन और तकनीकी नवाचारों के जरिए राज्यों की जरूरतों को पूरा करने पर बल दे रहा है. यूपी में भी जलवायु डेटा, बिजली गिरने की परफेक्ट भविष्यवाणी और खेती में उपग्रह आधारित सहायता जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं उपस्थित हैं. इन्हीं मुद्दों पर इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने आईएएनएस से खास वार्ता की. प्रस्तुत हैं मुख्य अंश.

Isro new chief v narayanan

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प्रश्न : क्या यूपी में जलवायु डेटा से जुड़ी कोई योजना है?

जवाब: देखिए, इसरो मौसम की भविष्यवाणी के लिए कई काम कर रहा है. मौसम का अनुमान लगाना भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का मुख्य काम है, लेकिन इसरो अपने सैटेलाइट डेटा से मौसम में परिवर्तन का शोध करता है. इससे मौसम की भविष्यवाणी को और परफेक्ट करने में सहायता मिलती है. अभी हमारे पास कुछ सैटेलाइट हैं, और हम इन्हें और बेहतर कर रहे हैं ताकि मौसम का अनुमान और ठीक हो. यदि मौसम की भविष्यवाणी परफेक्ट होगी, तो बदलावों को पहले से जानना आसान हो जाएगा. यूपी के बारे में बात करें तो, सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बिजली गिरने से लोगों की जान और पैसों का हानि होता है. इसरो इस क्षेत्र में राज्य गवर्नमेंट के साथ मिलकर काम कर सकता है, ताकि बिजली गिरने की परफेक्ट भविष्यवाणी हो सके. इसके अलावा, इसरो 55 से अधिक क्षेत्रों में काम कर रहा है, जैसे खेती, मौसम, फसल की पैदावार, खाद्य सुरक्षा, पानी की सुरक्षा, टेली-एजुकेशन, और टेली-मेडिसिन. हम हर राज्य गवर्नमेंट से उनकी जरूरतों के बारे में बात कर रहे हैं और उसी हिसाब से उनकी सहायता करने की प्रयास कर रहे हैं.


प्रश्न : क्या यूपी गवर्नमेंट के साथ खेती के क्षेत्र में कोई योगदान हो सकता है?

जवाब: मैं खेती का वैज्ञानिक नहीं हूं, लेकिन इसरो खेती में बहुत कुछ कर सकता है. हमारे सैटेलाइट डेटा से फसल की पैदावार का संभावना व्यक्त किया जा सकता है और बीमा से जुड़े काम किए जा सकते हैं. जैसे, यदि कोई किसान कहता है कि उसकी फसल खराब हो गई, तो उसकी जांच के लिए खेत पर जाना पड़ता है, जिसमें समय लगता है. लेकिन सैटेलाइट डेटा से तुरंत पता चल सकता है कि हानि कितना हुआ. इसके अलावा, इसरो खाद्य सुरक्षा, पानी की सुरक्षा, टेलीकम्युनिकेशन, टेलीविजन, टेली-एजुकेशन, मौसम भविष्यवाणी, आपदा चेतावनी, और ट्रेनों को जोड़ने जैसे कई काम कर रहा है. अभी 8700 ट्रेनें रियल-टाइम में जुड़ी हैं. साथ ही, समुद्र में नावों को जोड़ने का काम भी चल रहा है. हिंदुस्तान के पास 7500 एकड़ समुद्री तट है, और हमारी जिम्मेदारी है कि तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा हो. हम एक नेविगेशन ऐप बना रहे हैं, जिससे मछुआरे समुद्र में अपनी ठीक स्थान जान सकें और गलती से अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार न करें. यह ऐप अभी छोटे क्षेत्र में काम कर रहा है और जल्द ही पूरे राष्ट्र में फैलेगा.

प्रश्न : इसरो और किन-किन क्षेत्रों में सहायता कर सकता है?

जवाब: इसरो रियल-टाइम में ट्रेनों की नज़र कर रहा है, जिससे यात्रियों को बहुत लाभ हो रहा है. अभी 8700 ट्रेनें इससे जुड़ी हैं. इसके अलावा, गाड़ियों की नज़र और वाहनों को ट्रैक करने में भी सैटेलाइट की सहायता ली जा सकती है. पिछले चार महीनों में इसरो ने हर राज्य के ऑफिसरों और विभागों जैसे खेती, पानी, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, शिक्षा, खनन और कौशल विकास से बात की है. इन चर्चाओं के आधार पर इसरो 10-15 वर्ष का एक विजन डॉक्यूमेंट तैयार करेगा, जिसे पीएम की स्वीकृति के बाद लागू किया जाएगा.

प्रश्न : यदि कोई राज्य सहायता चाहे, तो इसरो क्या करेगा?

जवाब: आजकल अंतरिक्ष क्षेत्र बहुत अहम है. यदि कोई राज्य गवर्नमेंट पहल करती है और अपनी आवश्यकता बताती है, तो इसरो उसकी सहायता करने की पूरी प्रयास करेगा.

प्रश्न : इसरो के भविष्य के प्रोजेक्ट्स क्या हैं?

जवाब: इसरो कई बड़े काम कर रहा है. हाल ही में हमने एक विमान का टेस्ट किया. हम तीन मानव रहित मिशन की तैयारी कर रहे हैं. पहला मिशन इस वर्ष दिसंबर में होगा, जिसमें वायुमित्र उड़ेगा. अगले वर्ष दो और मानव रहित मिशन होंगे. इसके बाद 2027 की पहली तिमाही में मानव मिशन होगा.

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