मौसम के उतार-चढ़ाव से गेहूं की फसल को हुआ नुकसान
कानपुर: देश भर में इस बार मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। यूपी में भी मौसम लगतार बदलता हुआ नजर आ रहा है। इस बार मौसम की मार ने गेहूं की फसल को काफी हानि पहुंचाया है। किसानों को अच्छे दाने और अच्छी पैदावार की आशा थी, लेकिन पिछले दो महीनों में तापमान के उतार-चढ़ाव ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के चलते इस बार सर्दी असामान्य रही, जिससे गेहूं की फसल पर असर पड़ा है। जानकारों का बोलना है कि इस बार गेहूं के दाने छोटे रह गए हैं और उनकी चमक भी कम हो गई है।

तापमान में उतार-चढ़ाव बना कठिनाई की वजह
चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी के मौसम जानकार डाक्टर एस।एन। सुनील पांडेय ने कहा कि गेहूं की अच्छी फसल के लिए दिन का तापमान 20 से 22 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 7 से 8 डिग्री सेल्सियस रहना महत्वपूर्ण होता है। लेकिन इस बार पश्चिमी विक्षोभ के कारण दिन का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक चला गया और रात का पारा 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इस वजह से गेहूं की फसल कमजोर हो गई और दाने पूरी तरह नहीं भर पाए।
देर से बोई गई फसलों को अधिक नुकसान
विशेषज्ञों का बोलना है कि जिन किसानों ने नवंबर में गेहूं बोया था, उन्हें अधिक हानि हुआ है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में किसानों ने इस हानि को लेकर चिंता जताई है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सुझाव भेजे हैं, ताकि वे आने वाले समय में अपनी फसल बचा सकें। हाल ही में एक और पश्चिमी विक्षोभ आया, जिससे तापमान स्थिर हुआ है। इस कारण दिन का तापमान थोड़ा गिरा और रातें भी ठंडी हुई। यह गेहूं की फसल के लिए अच्छा संकेत है। यदि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल रहा, तो हानि की भरपाई हो सकती है।
देश का 50 फीसदी गेहूं उत्पादन उत्तर प्रदेश और एमपी में
भारत में हर वर्ष लगभग 1076 लाख टन गेहूं का उत्पादन होता है, जिसमें से 50 फीसदी गेहूं यूपी और मध्य प्रदेश में पैदा होता है। इसलिए इन राज्यों में हुई फसल को हानि राष्ट्र के कुल उत्पादन पर भी असर डाल सकता है यदि गेहूं की गुणवत्ता खराब हुई, तो इसकी कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
फसल को लेकर चिंतित किसान
पंजाब, हरियाणा, यूपी और मध्य प्रदेश के किसान इस बार गेहूं की गुणवत्ता को लेकर परेशान हैं।कई किसानों का बोलना है कि दाने का आकार छोटा होने से उन्हें बाजार में ठीक मूल्य नहीं मिल पाएगा। वहीं, कृषि वैज्ञानिकों का बोलना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक मौसम ठीक रहा, तो कुछ हद तक हानि की भरपाई संभव है।

