संभल के चौराहे का चौड़ीकरण: प्रशासन ने सड़कों पर बिछी दुकानों पर कसा शिकंजा
संभल के चंदौसी चौराहे का चौड़ीकरण होगा, नगर पालिका परिषद संभल की ओर से यहां सम्राट पृथ्वीराज चौहान की विराट प्रतिमा लगाई जाएगी. चोर आया चारों ओर 45 फीट चौड़ा होगा और चौराहे की चौड़ीकरण में आ रही दुकानों को तोड़ने के लिए लाल निशान लगा दिए गए हैं. 18-16 फिट तक की दुकान इसकी जद में आई है. चौराहे के चौड़ीकरण में दुकान 50-60 वर्ष पुरानी है, उनके सामने एक परेशानी खड़ी हो गई है कुछ दुकान ऐसी है पूरी की पूरी चौड़ीकरण में जा रही हैं.

संभल का विद्युत विभाग बिजली के पल और हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट करेगा, वहीं पीडब्ल्यूडी विभाग तहसील प्रशासन और नगर पालिका परिषद की टीम ने चौराहा चौड़ीकरण का काम प्रारम्भ कर दिया है. पालिका ईओ डाक्टर मणिभूषण तिवारी ने कहा कि शहर के चंदौसी चौराहे का चौड़ीकरण का काम पहले से चल रहा है, कब्ज़ा कार्यों को हिदायत दी गई है कि अपना कब्ज़ा हटा लें और बोर्ड में सभासद/सदस्य चंचल के शहर में विकास के लिए प्रस्ताव लाया गया. सम्राट पृथ्वीराज चौहान की संभल राजधानी रहा है इसलिए चौराहे पर प्रतिमा लगाने की प्रस्ताव रखते हुए उसे पास किया गया है. प्रतिमा एवं चौराहे की चोरी कर्म को लेकर के काम चल रहा है जिससे प्रतिमा अच्छे रूप में बन सके.
जानिए, चौराहा चौड़ीकरण पर क्या कहे दुकानदार
मोहम्मद इरशाद ने कहा कि मेरी सन 1965 से दुकान है और मैं इसमें सैलून का चलाता हूं. मुझे चिंता सता रही है इस दुकान से 20 आदमियों का परिवार परिवार चला रहा हूँ. अब हम कैसे घर चलाएंगे हम तो खुदकुशी कर लेंगे. हमारी गवर्नमेंट से मांग है की गवर्नमेंट हमें दुकान और रोजगार दें.
कल्लन ने कहा कि मेरी 50 वर्ष से दुकान है और यह दुकान काटने को कह रहे हैं. और मैं इसी दुकान से अपने घर का पालन पोषण करता हूँ. जब दुकान ही नहीं रहेगी तो बच्चों का पालन पोषण कहां से करेंगे. हमारे पास तो ना जमीन है ना जायदाद.
मुजम्मिल ने कहा कि मेरी सैलून की दुकान है और यह लगभग 60 वर्ष पुरानी दुकान है. दुकान टूट रही है तो कैसे ना कैसे गुजारा करेंगे. दुकान का बैनामा हुआ है लेकिन नक्शा पास नहीं है. कुछ नहीं समझ में आ रहा की क्या करें. हमें केवल यह टेंशन है कि हम रोजगार से बैठ जाएंगे.
मोहम्मद इकबाल ने कहा कि मेरी 60 70 वर्ष पुरानी दुकान है इस पर मेरे पिताजी बैठा करते थे उनके गुजर जाने के बाद बड़े भाई बैठे फिर उनकी भी मृत्यु हो गई अब में बैठता हूं. मेरे दो बच्चे हैं जो अभी बहुत छोटे हैं निशान लगा है तो कठिनाई तो है ही. यदि हमें मुआवजा मिल जाए तो हमारे बच्चों का थोड़ा बहुत सहारा हो जाएगा. 14 फीट का निशान लगाने के बाद 6 फीट मेरी दुकान बच रही है.
आनंद कुमार शर्मा ने कहा कि यह दुकान तो बहुत पुरानी है लेकिन मैंने 6 वर्ष पहले ली थी. यह मैंने रेंट पर ली थी और यही मेरी रोजी रोटी का साधन है. गवर्नमेंट नागरिकों के बारे में क्या कर सकती है यह तो गवर्नमेंट को ही सोचना है. मेरी दुकान 20 फीट की है.

