उत्तर प्रदेश

क्या सपा-कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाएगी पटेल-ओवैसी की यारी…

उत्तर प्रदेश में लोकसभा का मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए और सपा और कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाले इण्डिया गठबंधन के बीच होगा. अकेले चुनाव लड़ रही बीएसपी इन दोनों गठबंधनों के लिए कड़ी चुनौती पेश कर सकती है. इन सबके बीच एक और ऐसा गठबंधन हुआ है जो बीजेपी से अधिक सपा और कांग्रेस पार्टी के गठजोड़ को परेशान कर सकता है.

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लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पारा चढ़ने के बीच यूपी में एक नया गठबंधन सामने आया है. ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलाइंस’ (इंडिया) गठबंधन से नाराज होकर अलग हुए अपना दल (कमेरावादी) और ऑल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहाद उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने रविवार को पीडीएम (पिछड़ा, दलित, मुसलमान) इन्साफ मोर्चा बनाकर यूपी में साथ मिलकर चुनाव लड़ने का घोषणा किया.

एआईएमआईएम को अपने पिछले चुनाव में उत्तर प्रदेश में सीमित कामयाबी मिली थी, वहीं अपना दल (कमेरावादी) हाल तक समाजवादी पार्टी का सहयोगी था. इसके अतिरिक्त इस मोर्चे में बाबूराम पाल के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय उदय पार्टी और प्रेम चंद बिंद के नेतृत्व वाली प्रगतिशील मानव समाज पार्टी भी शामिल है. इन पार्टियों ने अपने मोर्चे का नाम पीडीएम रखा है. इसे सपा के पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) के लिए चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है. इससे समाजवादी पार्टी के मुस्लिम-यादव वोट बैंक में सेंध लगने की आसार है.

पीडीएम लॉन्च पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और अपना दल (के) नेता पल्लवी पटेल के भाषण का निशाना भी समाजवादी पार्टी रही. ओवैसी ने कहा, “यूपी में पिछले विधानसभा चुनाव में, 90% मुसलमानों ने एसपी को वोट दिया, लेकिन नतीजा क्या हुआ?… कोई भी मुसलमान समुदाय का नेतृत्व नहीं चाहता है. वे सिर्फ़ अपना वोट मांगते हैं.” पल्लवी पटेल ने भी समाजवादी पार्टी पर पीडीए के दावों को लेकर दोहरा रुख अपनाने का इल्जाम लगाया. उन्होंने इल्जाम लगाया कि अखिलेश यादव पिछड़ों को अहमियत देने के अपने वादे पर खरे नहीं उतरे हैं. इण्डिया ब्लॉक के लिए, पीडीएम मोर्चे का उदय बड़ा झटका इसलिए भी है क्योंकि इस गठबंधन ने हाल ही में आरएलडी के रूप में अपना एक सहयोगी गंवाया था.

वैसे जिन दो विधानसभा चुनावों में एआईएमआईएम ने भाग लिया, उन पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश में हैदराबाद स्थित पार्टी की उपस्थिति न के बराबर है. वहीं अपना दल (के) ने 2022 में और भी खराब प्रदर्शन किया था. यह उसका चुनाव था. 2017 में, उत्तर प्रदेश में अपने पहले विधानसभा चुनाव में, एआईएमआईएम ने 38 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी सीट नहीं जीती, उसे कुल वोट शेयर का केवल 0.24% मिला. 2022 में उसने 95 सीटों पर उम्मीदवार उतारे. इसके वोट शेयर में हल्की सुधार हुआ और इसे 0.49% वोट मिले थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2023 में, AIMIM ने शहरी क्षेत्रीय निकाय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया. इसके पांच उम्मीदवार नगर पालिका परिषद या नगर पंचायत अध्यक्ष के रूप में चुने गए. इसके 75 उम्मीदवार नगर निगमों के लिए चुने गए. हालांकि वह मेरठ मेयर पद के उम्मीदवार की दौड़ में बीजेपी से हार गई, लेकिन वह समाजवादी पार्टी से आगे निकल गई थी. जहां तक लोकसभा चुनाव का प्रश्न है, एआईएमआईएम ने उत्तर प्रदेश में अभी तक केंद्रीय चुनाव नहीं लड़ा है. इसने 2019 में, उत्तर हिंदुस्तान में सिर्फ़ एक सीट पर (बिहार में) चुनाव लड़ा और तीसरे जगह पर रही थी.

इस बीच, अपना दल की स्थापना सोनीलाल पटेल ने 1995 में बीएसपी से अलग होकर एक समूह के रूप में की थी. 2016 में, पार्टी फिर से विभाजित हो गई और अपना दल (कमेरावादी) का उदय हुआ. इसका नेतृत्व सोनीलाल की सबसे बड़ी बेटी और मौजूदा विधायक पल्लवी पटेल कर रही हैं. वहीं अपना दल (सोनीलाल) का नेतृत्व पल्लवी की छोटी बहन और दो बार की सांसद अनुप्रिया कर रही हैं. 2014 तक अपना दल एक भी लोकसभा सीट जीतने में असफल रही थी. लेकिन 2014 में बीजेपी के साथ गठबंधन से एकजुट पार्टी को दो संसदीय सीटें जीतने में सहायता मिली. विभाजन के बाद, अनुप्रिया का गुट अधिक प्रभावशाली पार्टी के रूप में उभरा और 2019 में, उसने फिर से दो लोकसभा सीटें जीतीं. हालांकि, अपना दल (के) ने 2019 में चुनाव नहीं लड़ा. हाल के विधानसभा चुनावों में भी, पल्लवी के गुट को संघर्ष करना पड़ा है, जबकि अनुप्रिया की पार्टी एनडीए में अपने लिए स्थान बनाने में सफल रही है.

वर्तमान में पल्लवी पटेल कौशांबी जिले के सिराथू विधानसभा क्षेत्र से सपा की विधायक हैं. अपना दल (कमेरावादी) ने 22 मार्च को आनें वाले लोकसभा चुनावों के लिए कोई सीट नहीं दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त की थी और बोला था कि ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं को साफ करना चाहिए कि वह अभी भी गठबंधन का हिस्सा है या नहीं. उनका यह बयान सपा के प्रमुख अखिलेश यादव की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें उन्होंने बोला था कि अपना दल (कमेरावादी) के साथ गठबंधन 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए था न कि लोकसभा चुनावों के लिए. पल्लवी पटेल की पार्टी ने ‘इंडिया’ गठबंधन से फूलपुर, मिर्जापुर और कौशांबी लोकसभा सीट देने का आग्रह किया था लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं दिया गया था. पल्लवी पटेल ने 2022 का विधानसभा चुनाव सिराथू सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा था और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को हराया था.

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