सोना पहुंचा अब तक के उच्चतम स्तर पर, पिछले एक साल में दिया 20% से अधिक रिटर्न
गोल्ड 80,000 रुपए प्रति 10 ग्राम का लेवल पार करके 80,142 रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है. IBJA के मुताबिक इस वर्ष अब तक केवल 22 दिन में ही सोने के मूल्य 3,980 रुपए बढ़ चुके हैं. 31 दिसंबर को सोना 76,162 रुपए पर था, जो अब 80,142 रुपए प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है.

एक्सपर्ट के मुताबिक आने वाले दिनों में भी इसमें तेजी देखने को मिल सकती है और ये इस वर्ष जून तक 85 हजार तक जा सकता है. यदि आप भी सोने में निवेश करने का मन बना रहे हैं तो गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ETFs में निवेश एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इसने बीते 1 वर्ष में 25% तक का रिटर्न दिया है. ऐसे में यहां हम आपको गोल्ड ETF के बारे में बता रहे हैं…
सोने के गिरते-चढ़ते भावों पर बेस्ड होते हैं ETF एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सोने के गिरते-चढ़ते भावों पर बेस्ड होते हैं. एक गोल्ड ETF यूनिट का मतलब है कि 1 ग्राम सोना. वह भी पूरी तरह से प्योर. गोल्ड ETFs की खरीद-बिक्री शेयर की ही तरह BSE और NSE पर की जा सकती है. हालांकि, इसमें आपको सोना नहीं मिलता. आप जब इससे निकलना चाहें तब आपको उस समय के सोने के रेट के बराबर पैसा मिल जाएगा.
गोल्ड ETF में निवेश करने के 5 फायदे
- कम मात्रा में भी खरीद सकते हैं सोना: ETF के जरिए सोना यूनिट्स में खरीदते हैं, जहां एक यूनिट एक ग्राम की होती है. इससे कम मात्रा में या SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए सोना खरीदना आसान हो जाता है. वहीं भौतिक (फिजिकल) सोना आमतौर पर तोला (10 ग्राम) के रेट बेचा जाता है. ज्वेलर से खरीदने पर कई बार कम मात्रा में सोना खरीदना संभव नहीं हो पाता.
- मिलता है शुद्ध सोना: गोल्ड ETF की मूल्य पारदर्शी और एक समान होती है. यह लंदन बुलियन बाजार एसोसिएशन का अनुसरण करता है, जो कीमती धातुओं की ग्लोबल अथॉरिटी है. वहीं फिजिकल गोल्ड भिन्न-भिन्न विक्रेता/ज्वेलर भिन्न-भिन्न मूल्य पर दे सकते हैं. गोल्ड ETF से खरीदे गए सोने की 99.5% शुद्धता की गारंटी होती है, जो कि सबसे उच्च स्तर की शुद्धता है. आप जो सोना लेंगे उसकी मूल्य इसी शुद्धता पर आधारित होगी.
- नहीं आता ज्वेलरी मेकिंग का खर्च: गोल्ड ETF खरीदने में 1% या इससे कम की ब्रोकरेज लगती है, साथ ही पोर्टफोलियो मैनेज करने के लिए सालाना 1% चार्ज देना पड़ता है. यह उस 8 से 30% मेकिंग चार्जेस की तुलना में कुछ भी नहीं है, जो ज्वेलर और बैंक को देना पड़ता है, भले ही आप सिक्के या बार खरीदें.
- सोना रहता है सुरक्षित: इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड डीमैट एकाउंट में होता है, जिसमें केवल सालाना डीमैट चार्ज देना होता है. साथ ही चोरी होने का डर नहीं होता. वहीं फिजिकल गोल्ड में चोरी के खतरे के अतिरिक्त उसकी सुरक्षा पर भी खर्च करना होता है.
- व्यापार की आसानी: गोल्ड ETF को बिना किसी कठिनाई के तुरंत खरीदा और बेचा जा सकता है. गोल्ड ETF को लोन लेने के लिए सिक्योरिटी के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
इन गोल्ड ETF फंड्स ने दिया अच्छा रिटर्न
| फंड का नाम | बीते 1 वर्ष में रिटर्न | बीते 3 वर्ष में रिटर्न | बीते 5 वर्ष में रिटर्न |
| ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ETF | 32.13% | 62.06% | 93.64% |
| एक्सिस गोल्ड ETF | 28.34% | 64.51% | 96.52% |
| बिरला सन लाइफ गोल्ड ETF | 27.10% | 60.94% | 95.02% |
| निप्पॉन गोल्ड ETF | 27.02% | 60.06% | 88.33% |
| SBI गोल्ड ETF | 27.00% | 60.89% | 92.70% |
इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश?
गोल्ड ETF खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट एकाउंट खोलना होता है. इसमें NSE पर मौजूद गोल्ड ETF के यूनिट आप खरीद सकते हैं और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट एकाउंट से जुड़े बैंक एकाउंट से कट जाएगी. आपके डीमैट एकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद गोल्ड ETF आपके एकाउंट में डिपॉजिट हो जाते हैं. ट्रेडिंग खाते के जरिए ही गोल्ड ETF को बेचा जाता है.
सोने में सीमित निवेश फायदेमंद
एक्सपर्ट के अनुसार, भले ही आपको सोने में निवेश करना पसंद हो तब भी आपको इसमें सीमित निवेश ही करना चाहिए. कुल पोर्टफोलियो का केवल 10 से 15% ही सोने में निवेश करना चाहिए. किसी संकट के दौर में सोने में निवेश आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता दे सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह आपके पोर्टफोलियो के रिटर्न को कम कर सकता है.

