बर्फ में फंसे आखिरी चार मजदूरों के मिले शव, बचाए गए 46 लोग
Uttarakhand Mana Avalanche Latest Update: उत्तराखंड के माणा गांव में बर्फ में फंसे अंतिम चार श्रमिकों के मृतशरीर रविवार को बाहर निकाल लिए गए. इससे पहले भी 4 श्रमिकों की बॉडी निकाली गई थी, जिससे अब इस हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 8 हो गई. जबकि 46 लोगों को सकुशल बचा लिया गया है. रविवार को बर्फ से निकाले गए 4 शवों के साथ ही 60 घंटे तक चला बचाव-राहत अभियान भी समाप्त हो गया.

अचानक हुए हिमस्खलन में फंस गए मजदूर
चमोली जिले के ऑफिसरों ने कहा कि बदरीनाथ के पास माणा गांव के पास सड़क निर्माण के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) की ओर से 54 मजदूर काम कर थे. उनके रहने के लिए BRO ने 8 भिन्न-भिन्न कंटेनर में शिविर बनाए थे. इनमें से 5 शिविरों में मजदूर रह रहे थे, जबकि 3 में उनकी रसद सामग्री भरी थी. लेकिन शुक्रवार को अचानक ग्लेशियर ढह जाने की वजह से वहां भारी हिमस्खलन हो गए. जान बचाने के लिए 10 मजदूर बद्रीनाथ की ओर भाग खड़े हुए, जबकि बाकी मजदूर अपने कंटेनरों में फंस गए थे.
6 फुट ऊंची बर्फ में दब गए श्रमिकों के कंटेनर
उनके कंटेनरों के ऊपर बिल्कुल से 6 फुट तक बर्फ जम गई थी. घटना का पता चलने पर सेना ने तुरंत बचाव अभियान प्रारम्भ किया. ज्योतिर्मठ छावनी से गढ़वाल स्काउट के जवानों ने बर्फ से ढकी सड़कों को जैसे-तैसे पार करते माणा तक जाने का रास्ता बनाया. इसके बाद कई किमी तक पैदल चलकर बर्फ में दबे श्रमिकों के कंटेनर ढूंढकर उनसे प्रभावितों को बाहर निकाला गया. सभी मजदूर भिन्न-भिन्न कंटेनरों में फंसे हुए थे. उनमें से 46 मजदूरों को ज्योतिर्मठ के सैनिक हॉस्पिटल लाया गया, जिनमें से दो को हवाई एंबुलेंस के जरिये बेहतर इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश भेज दिया गया.
पीएम मोदी की भी लगी हुई थी निगाहें
इस बचाव राहत अभियान पर राज्य गवर्नमेंट के साथ केंद्र की नजरें भी लगी हुई थीं. प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से बात करके घटना की जानकारी ली. साथ ही किसी भी तरह की सहायता का आश्वासन दिया. मुख्यमंत्री धामी ने हेलीकॉप्टर से मौके का दौरा कर हालात का जायजा लिया. बद्रीनाथ में अब भी कई-कई फीट तक बर्फ जमी हुई है. बताया जा रहा है कि अभी कुछ दिनों तक माणा गांव के आसपास के हालात ऐसे ही रहने वाले हैं. फिलहाल परिस्थितियों को देखते हुए बीआरओ ने वहां का काम रोक दिया है.

