उत्तराखण्ड

पहाड़ों पर खेती करने के लिए अपनाएं ये असरदार तरीका

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में किसान परंपरिक खेती छोड़ कर अब फलों की बागवानी कर रहे हैं लेकिन पर्वतीय क्षेत्र में किसानों के पास खेती लायक जमीन कम है जिसके कारण किसान बड़े पैमाने पर फलों की बागवानी नही कर पा रहे हैं आज हम पर्वतीय क्षेत्र के किसानों के लिए एक ऐसी ही तकनीक के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में किसान छोटी सी स्थान पर बड़े पैमाने पर फलों की बागवानी कर सकते हैं सघन बागवानी की तकनीक के जरिए किसान छोटे से खेत में भी बड़े पैमाने पर फलों के पेड़ लगाकर उससे अच्छा फायदा कमा सकते हैं आइए जानते हैं क‍ि सघन बागवानी क्या है इस तकनीक को क‍िसान कैसे अपना सकते हैं इससे कैसा उत्पादन म‍िलेगा

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गढ़वाल विश्विद्यालय के हैप्रेक के कृषि एक्सपर्ट डाक्टर जयदेव चौहान ने लोकल 18 को कहा कि सघन बागवानी की तकनीक के जरिए किसान पर्वतीय क्षेत्रों में फलों की बागवानी कर सकते हैं बागवानी की इस तकनीक में छोटी सी स्थान में फलों के अधिक पेड़ों को लगाया जा सकता है इस तकनीक के जरिये पर्वतीय क्षेत्र के किसान सेब, नाशपाती, खुमानी, आडू, अमरूद और माल्टा जैसे फलों के पेड़ लगा सकते हैं इस तकनीक में फलों की पौध लगाते समय पौधों को कम से कम दूरी पर लगाना होता है

1 एकड़ में लगा सकते हैं 1300 पेड़
साधारण प्रजाति की बागवानी विधि में पौधे से पौधे की दूरी 10 मीटर में होती है, जिसमें 1 हेक्टेयर में लगभग 100 पौधे लगते हैं लेकिन सघन बागवानी में पौधे से पौधे की दूरी ढाई से 3 मीटर तक रखनी होती है इससे एक हेक्टेयर में लगभग 1300 के इर्द-गिर्द पौध लगाई जा सकती है सघन बागवानी के लिए पहले ही किसानों को दूरी के मुताबिक खेत में निशान बनाना पड़ता है उसके मुताबिक ही पेड़ लगाने होते हैं इसके लिए पेड़ों की ऐसी किस्मों का चयन करना होता है, जिनकी जड़ अधिक गहराई में न जाती हो और आकार अधिक बड़ा न होता हो या यूं कह लीजिये की बौनी प्रजाति के पेड़ों का चयन करना होता है ये किस्में आपको किसी भी नर्सरी की सहायता से सरलता से मिल जाएंगे

सघन बागवानी में इन बातों का रखें ध्यान
सघन बागवानी करते समय जब पौध बड़ी होने लगती है, तो उसे लगभग 70 सेंटीमीटर ऊंचाई होने पर काट दें उसके दो से तीन महीने बाद पौध में मजबूत डालियां विकसित होने लगती हैं पेड़ के नयी शाखाओं से फल निकलते हैं इसलिए इन्हें विकसित होने दें वर्ष में 3 से 4 बार पेड़ की कटाई-छटाई करनी होती हैं वहीं सघन बागवानी में पौधों की ऊंचाई छोटी होती है, इसलिए किसान पेड़ों के बीच की स्थान में मौसमी सब्जियों की खेती भी कर सकते हैं

सेब की इस प्रजाति का करें इस्तेमाल
सघन बागवानी में पर्वतीय क्षेत्रों में सेब की बागवानी की जा सकती है क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों में सेब की सघन बागवानी का चलन काफी प्रचलित हो रहा है इसमें सेब की एम 99 प्रजाति ले सकते हैं, क्योंकि इसकी ऊंचाई 10 से 12 फीट तक लंबी होती है और इसकी वर्ष में तीन से चार बार कटाई-छटाई करनी होती है सेब की यह प्रजाति सघन बागवानी में 3 वर्ष में फल देना प्रारम्भ कर देती हैं यह प्रजाति कम समय में ही अधिक उत्पादन देना प्रारम्भ कर देती हैं

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