तबाही ला सकता है क्लाइमेट चेंज, नैनीताल में मानसून ने दिखाई नरमी
नैनीताल: उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल इन दिनों जलवायु बदलाव की तीव्र मार झेल रही है। हरियाली और नैनीझील के लिए पहचाने जाने वाले इस शहर में इस बार मानसून ने अपेक्षित राहत नहीं दी है। इसके चलते नैनीझील का जलस्तर बीते सालों की तुलना में चिंताजनक रूप से नीचे चला गया है। जुलाई के अंत तक झील का जलस्तर महज 5 फीट 2 इंच रिकॉर्ड किया गया है, जो पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कम है।

क्या कहते हैं आंकड़े
सिंचाई विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 में जुलाई में नैनीझील का जलस्तर 10 फीट था। 2022 में यह गिरकर 4 फीट रह गया था, जबकि 2023 में मानसून बेहतर होने के कारण जलस्तर 9 फीट 9 इंच दर्ज हुआ था। 2024 में यह थोड़ा घटकर 9 फीट रहा, लेकिन 2025 में स्थिति फिर से बिगड़ गई और झील का जलस्तर 5 फीट 2 इंच तक आ गया है।
बारिश भी औसत से काफी कम
सिंचाई विभाग के अनुसार, नैनीताल जिले में इस बार जुलाई तक कुल 891 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य औसत 1200–1300 मिमी से काफी कम है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डीडी सती के अनुसार, पिछले वर्ष जुलाई में 657 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जबकि इस वर्ष सिर्फ़ 346 मिमी बारिश हुई है, यही वजह है कि झील का जलस्तर गिरा है।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़े
पिछले पांच वर्षों में बारिश के आंकड़े बताते हैं कि साल 2021 में 1342 मिमी, 2022 में 1193 मिमी, 2023 में 1288 मिमी और 2024 में 1019 मिमी बारिश हुई। 2025 में जुलाई तक सिर्फ़ 891 मिमी वर्षा हुई है, जो कि लगातार गिरते ग्राफ को दर्शाता है। जलवायु बदलाव के असर अब पहाड़ों में भी साफ नजर आ रहे हैं। झीलों का जलस्तर गिरना न सिर्फ़ जल संकट को जन्म देता है बल्कि क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यटन उद्योग को भी प्रभावित करता है। जानकारों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले सालों में नैनीताल को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

