सर्दियों में भी चारधाम यात्रा करने से पीछे नहीं हट रहे हैं श्रद्धालु
उत्तराखंड में शीतकालीन चारधाम यात्रा (Winter Chardham Yatra Uttarakhand) श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बन गई है। 8 दिसंबर को सीएम पुष्कर सिंह धामी द्वारा शुरुआत किए गए इस यात्रा कार्यक्रम को लेकर राज्य गवर्नमेंट पूरी तत्परता से जुटी हुई है।

चारों धामों के शीतकालीन गद्दीस्थलों पर देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, जहां उनके ठहरने और दर्शन की सुविधाओं को बेहतर बनाया गया है। यात्रा के दौरान भक्तों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
गढ़वाल मंडल के आईजी राजीव स्वरूप ने लोकल 18 से बोला कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल को तैनात किया गया है। यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए सभी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। डीजीपी दीपम सेठ के निर्देश पर देहरादून, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी के पुलिस ऑफिसरों ने विशेष एसओपी तैयार की है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को एक सुखद और यादगार अनुभव प्रदान करना है।
बाबा केदार और भगवान बद्री विशाल के गद्दीस्थल
केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की पंचमुखी डोली उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान है। अगले साल कपाट खुलने तक यहीं पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालु उखीमठ पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन और पूजा का पुण्य कमा रहे हैं। इसी तरह भगवान बद्री विशाल की डोली पांडुकेश्वर स्थित योग ध्यान बद्री मंदिर में पहुंचती है। यहां श्रद्धालु भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर सकते हैं।
मां गंगा और यमुना के दर्शनों का विशेष मौका
मां गंगा की डोली मुखवा गांव स्थित गद्दीस्थल पर विराजमान होती है, जबकि मां यमुना की डोली खरसाली स्थित यमुना मंदिर में रखी जाती है। इन स्थानों पर भी श्रद्धालु शीतकालीन पूजा और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। उल्लेखनीय है कि शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरु होने के बाद से श्रद्धालुओं के बीच उत्साह बना हुआ है।
शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के प्रयास
बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष अजेन्द्र अजय ने बोला कि गद्दीस्थलों पर बुनियादी सुविधाएं और ढांचागत विकास के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे शीतकालीन पूजा स्थलों पर पहुंचकर भगवान के दर्शन और पूजा का फायदा उठाएं।
गौरतलब है कि अब तक शीतकालीन यात्रा के लिए 3000 से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। उत्तराखंड की यह यात्रा केवल तीर्थाटन नहीं बल्कि श्रद्धा, संस्कृति और हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा अनुभव है। गवर्नमेंट के प्रयासों और भक्तों की आस्था इसे एक नयी पहचान दे रही है।

