देव उठनी एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये काम
देहरादून। 23 नवंबर को देव उठनी एकादशी के दिन चातुर्मास का समाप्ति हो रहा है। मान्यता है कि श्री हरि यानी ईश्वर विष्णु चतुर्मास के शुरुआत पर शयन के लिए चले जाते हैं और पूरे चार महीने बाद निद्रा से उठते हैं। चातुर्मास लगने के बाद कोई भी मांगलिक कार्य करने की मनाही होते है लेकिन देव उठनी एकादशी के दिन से ही शुभ कार्यो की आरंभ हो जाती है।

देहरादून के पंडित योगेश कुकरेती ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बोला है कि चातुर्मास के समाप्ति के बाद देव उठनी एकादशी होती है। इन दिन से विवाह, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य प्रारम्भ हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके अगले दिन तुलसी और ईश्वर शालिग्राम का शादी करवाया जाता है। जिन दंपतियों के संबंध में कड़वाहट होती है या किसी की जीवन में कष्ट होते हैं ऐसे लोग ईश्वर विष्णु का शादी तुलसी से करवाते हैं तो उनके जीवन से कड़वाहट दूर हो जाती है। हमारे जीवन से कष्ट को दूर कर रिद्धि-सिद्धि देने वाले श्री हरि जब योग निद्रा से बाहर आ जाते हैं तो उनका पूजन किया जाता है। जिससे वह प्रसन्न होकर हमारे जीवन में समृद्धि और सुख प्रदान करते हैं।
भूलकर भी न तोड़े तुलसी के पत्ते
पंडित योगेश कुकरेती ने कहा कि देव उठनी एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी के पौधे नहीं तोड़ना चाहिए क्योंकि इससे ईश्वर विष्णु रुष्ट हो जाते हैं। मान्यता यह भी है कि देव उठनी एकादशी तिथि के दिन तामसिक और चावल खाने से बचना चाहिए। इसके साथ ही इस दिन मांस, मंदिरे का सेवन नहीं करना चाहिए। बोला जाता है कि इस दिन चावल खाने से आदमी रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है।
तुलसी शादी करवाने से मिलता हैं ये लाभ
देव उठनी एकादशी के दिन निद्रा से जागने पर श्रीहरि का पूजन होता है और अगले दिन शालिग्राम स्वरूप उनका तुलसी से शादी करवाया जाता है।माना जाता है कि तुलसी शादी से ईश्वर विष्णु और मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर कृपा बरसाते हैं। जिससे आदमी के जीवन में धन, वैभव, सुख आदि में वृद्धि होती है। इसी के साथ ही लक्ष्मी नारायण आदमी की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। कहा जाता है कि तुलसी शादी करवाने से आदमी को 1000 अश्वमेध यज्ञ करने के समान फल की प्राप्ति होती है।

