यहाँ पर साक्षात विराजमान है मां सिद्धेश्वरी, करती हैं हर मनोकामनां की पूर्ति
अल्मोड़ा। उत्तराखंड को देवभूमि बोला जाता है। यहां के कण-कण में देवी-देवताओं का वास है। आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अल्मोड़ा से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर मां सिद्धेश्वरी सिद्धपीठ के नाम से जाना जाता है। मंदिर करीब 115 वर्ष पुराना है। यहां आने के लिए आप क्वारब से दो किलोमीटर आगे मुक्तेश्वर रोड पर जाते हुए पहुंच सकते हैं। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि मां यहां पर साक्षात विराजमान हैं। जो भी यहां पर श्रद्धा रेट से आता है, माता उनकी इच्छा जरुर पूरा करती हैं।

वर्तमान में जहां पर माता का मंदिर स्थापित है, इस स्थान की कहानी भी रहस्य से भरी है क्योंकि पुजारी हेम चंद्र कपिल के पिता स्वर्गीय बच्ची राम कपिल को माता ने सपने में दर्शन दिए थे। इसके बाद उन्होंने यहां पर खुदाई की, जिसमें यहां से एक 9 मुखी शंख, त्रिशूल, एक प्रतिमा में गोरखनाथ और भगवान शंकर की मूर्ति और एक प्राचीन शिवलिंग भी निकला था। यहां पर माता की मूर्ति भी निकली, पर मूर्ति खंडित होने की वजह से दूसरी मूर्ति की स्थापना यहां पर की गई। यहां पर श्रद्धालु इच्छा लेकर आते हैं और जिनकी इच्छा पूरी हो जाती है, वे यहां दोबारा आकर पूजा-पाठ करते हैं, प्रसाद, घंटी और चुन्नी चढ़ाते हैं और भंडारा कराते हैं।
दो नदियों के संगम पर स्थित मंदिर
पुजारी हेम चंद्र कपिल ने लोकल 18 को कहा कि सूयाल और कुमानिया नदियों के संगम पर यह मंदिर स्थित है। मंदिर की स्थापना उनके पिता स्वर्गीय बच्ची राम कपिल द्वारा कराई गई थी। देवी ने उनके पिता को सपने में दर्शन दिए थे। इसके बाद यहां पर खुदाई करवाई, जिसमें एक 9 मुखी शंख, त्रिशूल, भगवानों की प्रतिमा निकली। उनके पिता पर देवी जागृत होती थीं। मंदिर में अल्मोड़ा के साथ-साथ विभिन्न जिलों के श्रद्धालु आते हैं।
हर इच्छा पूरी करती हैं मां सिद्धेश्वरी
श्रद्धालु दीपक शर्मा ने लोकल 18 से वार्ता में बोला कि उनका गांव पास में ही है और वह अक्सर इस मंदिर में आते हैं। सिद्धेश्वरी माता हर कार्य को पूरा करती हैं और उनके सारे रुके हुए काम भी माता पूरे करवाती हैं। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले कुछ समय पहले तक उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं हो पा रहा था और फिर उन्होंने माता से अर्जी लगाई। जिसके बाद माता ने उनकी सुनी और वह दोबारा से स्वस्थ होकर मंदिर आए हैं।

