केदारनाथ में घट रही प्राकृतिक आपदाओं के कारण लोगों को झेलनी पड़ रही है काफी परेशानियां
रुद्रप्रयाग : पूरे राष्ट्र में मूसलाधार बारिश हो रही है. कई राज्यों में ये तबाही लेकर आया है. उत्तराखंड में भी पहाड़ दरक रहे हैं, बादल फटने से भारी हानि हो रहा है. इस बीच केदारनाथ धाम पहुंचे श्रद्धालुओं को भी काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं. प्रशासन की ओर से फंसे लोगों तक राहत पहुंचाने की प्रयास जारी है.

इस बीच उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने कहा कि केदारनाथ में बुधवार रात को हुई भारी बारिश के कारण कई रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए. विभिन्न जगहों पर फंसे तीर्थयात्रियों और क्षेत्रीय लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस समेत अन्य सुरक्षा बल लगातार कार्य में जुटे हैं. हर स्तर पर सभी लोगों के सुरक्षित रेस्क्यू करने के कोशिश किए जा रहे हैं.
बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए वायु सेना के चिनूक और एमआई 17 विमान से भी यात्रियों को एयर लिफ्ट किया गया. वहीं, मैनुअल रेस्क्यू भी लगातार जारी है.
रुद्रप्रयाग प्रशासन ने आपदा में मृतकों एवं गुमशुदा यात्रियों के संबंध में स्थिति साफ की. प्रशासन के अनुसार अब तक दो मृतशरीर बरामद हुए हैं. यह दोनों मृतशरीर लिंचोली क्षेत्र से बरामद हुए हैं.
नेटवर्क कनेक्टिविटी की परेशानी के कारण यात्रियों को परिजनों से संपर्क करने में परेशानी हो रही है. विभिन्न जगहों पर रुके यात्रियों के लिए प्रशासन के स्तर से पर्याप्त भोजन, पानी और आवासीय प्रबंध भी की गई हैं.
जिला पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर 7579257572, 01364-233387 और इमरजेंसी नंबर 112 जारी कर यात्रियों के परिजनों की कॉल्स पर महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है. भीमबली में रुके 150 यात्रियों ने प्रीपेड काउंटर पर लगे वाई-फाई नेटवर्क के माध्यम से अपने परिजनों से वार्ता कर उन्हें कुशलता की जानकारी दी.
शुक्रवार को 599 लोगों को हेलीकॉप्टर सेवाओं से एयर लिफ्ट कर रेस्क्यू किया गया. जबकि, सोनप्रयाग से जंगल चट्टी के बीच फंसे 2024 और चौमासी में फंसे 161 तीर्थयात्रियों का रेस्क्यू किया गया. रेस्क्यू में जुटे लोगों का बोलना है कि बारिश रेस्क्यू में बाधा डाल रही है.
अब तक कुल 7,234 यात्रियों को हेलीकॉप्टर एवं मैनुअल ढंग से रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया है. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, वन विभाग, संबंधित जिला पुलिस और फायर एवं आपातकालीन सेवाओं की टीमें बचाव कार्य में जुटीं हैं.

