खास रिपोर्ट: जानिए, जोशीमठ को फिर से जीवित करने का प्लान
जोशीमठ धंस रहा है।। वहां जमीन लगातार धंस रही हैं। मकानों में बड़ी-बड़ी दारारें पड़ रही हैं। सड़कें टूट रही हैं। सैंकड़ों परिवार जान जोखिम में होने की वजह से खौफ के साए में जी रहे हैं। ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं। घरों को खाली कर दूसरी जगहों पर चले गए हैं। और भी न जाने क्या-क्या…ये खबरें आपको याद हैं? यह सब उस समय की है, जब जोशीमठ के ऊपर खतरा मंडराया था। ऐसा लगा था जैसे भगवान बद्रीनाथ का द्वार कहे जाने वाला जोशीमठ का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। जोशीमठ नगर क्षेत्र में भू-धंसाव की घटना को 22 महीने पूरे होने को है। अब 22 महीने बाद नगरवासियों के लिए कुछ आशा की किरणें जगी हैं। जोशीमठ अब फिर से बसेगा और नए सिरे से आबाद होगा। देखिए यह खास रिपोर्ट।

216 लोगों को पेमेंट दिया गया
जनवरी 2023 में जोशीमठ नगर के नौ वार्ड भू-धंसाव यानी जमीन धंसने और चटकने की वजह से प्रभावित हुए थे। करीब 800 से अधिक घरों को असुरक्षित कहा गया था। अब मौजूदा समय में उत्तराखंड गवर्नमेंट ने जोशीमठ को बचाने के लिए कई प्रोजेक्ट पर काम प्रारम्भ कर दिया है। इसका डीपीआर लगभग तैयार हो चुका है, जिससे क्षेत्रीय लोगों में यहां रहने की आशा जग चुकी है। पहले जोशीमठ नगर को खाली करने की बात की जा रही थी लेकिन अब जोशीमठ को ट्रीटमेंट के जरिए बसाने की प्रयास की जा रही है। इसका मतलब है कि जोशीमठ एक बार फिर से आबाद होगा।
तो चलिए जानते हैं जोशीमठ में क्या-क्या कार्य होंगे।
-अलकनंदा नदी और धौली नदी के तट पर सुरक्षा दीवार बनेंगे।
-मारवाड़ी पुल, विष्णु प्रयाग और ऐसा पुल तक सुरक्षा दीवार।
-नगर क्षेत्र के 7 नालों का ट्रीटमेंट होगा।
-एटी नाला, रविग्राम नाले औली नव गंगा नाला, तहसील नाले, कॉमेंट नाले का ट्रीटमेंट।
-जिओ टेक्निकल सर्वे के बाद भू-धंसाव एरिया को रोकने के लिए भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट ।
-नगर क्षेत्र में 97 किलोमीटर की नयी सिविर लाइन बनेगी।
-पंपिंग योजना से सिविर लाइन को जोड़ने की प्लानिंग है।
-पूरे नगर क्षेत्र के लिए नयी एसटीपी बनाने की योजना है।
-औली से लेकर अलकनंदा नदी तक सभी भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट होगा।
जोशीमठ में फिर जगा जोश
8 वैज्ञानिक संस्थाओं की ओर से जोशीमठ का भूगर्भीय सर्वे किया गया। इस दौरान पाया गया कि कुछ घर प्रभावित हुए हैं जिनको अभी मुआवजा नहीं मिला है। 216 परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है और अभी कुछ और लोग बचे हैं। क्षेत्रीय लोग बार-बार मुआवजे के लिए संघर्ष करते आए हैं और आगे भी संघर्ष करने की बात कह रहे हैं। वहीं प्रशासन की ओर से जोशीमठ नगर के 9 वार्डों में होने वाले ड्रेनेज, सीवर, नाले निर्माण तटबंध सुरक्षा के बारे में जानकारी लोगों के सामने रखी गई है। सिंचाई विभाग, जल संस्थान, पीडब्ल्यूडी जोशीमठ में ट्रीटमेंट का कार्य करेगी। जोशीमठ में ट्रीटमेंट वाला डीपीआर बनाकर तैयार हो चुका है और अब इसे आईआईटी रुड़की को भेजा जाएगा।

