बंदरों का आतंक! बंदर बच्चों से लेकर बड़ों पर कर रहे हमला
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बंदरों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। अल्मोड़ा जिले में भी लोग इस परेशानी से परेशान हैं। कटखने बंदर बच्चों से लेकर बड़ों पर धावा कर रहे हैं। कई इलाकों में जाने से लोग डरने लगे हैं। बीते दिनों बंदरों ने अल्मोड़ा के एक व्यापारी को घायल कर दिया। दरअसल व्यापारी नीरज चौहान अपने घर जा रहे थे कि अचानक बंदरों के झुंड ने पत्थर की पटाल नीचे गिरा दी, जो सीधे उनके सिर पर जा लगी। नीरज के सिर पर 8 टांके आए। लोकल 18 ने अल्मोड़ा के लोगों से इस परेशानी को लेकर खास वार्ता की।

अल्मोड़ा निवासी व्यापारी नीरज चौहान ने लोकल 18 से बोला कि वह अपने घर जा रहे थे। दो बंदर आपस में लड़ रहे थे। उनकी वजह से पत्थर की एक पटाल नीचे गिर गई और उनके सिर पर लगी। सिर से खून बहने लगा। क्षेत्रीय लोग फौरन उन्हें हॉस्पिटल लेकर गए, जहां पर उनके सिर पर 8 टांके लगे। उन्होंने बोला कि यदि उनकी स्थान पर कोई छोटा बच्चा पटाल की चपेट में आया होता, तो यह घटना उसके लिए जानलेवा भी हो सकती थी। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि अल्मोड़ावासियों को बंदरों से निजात दिलाई जाए।
चारों तरफ बंदरों का आतंक
अल्मोड़ा के रहने वाले गिरीश धवन ने बोला कि शहर में बंदरों का आतंक केवल एक स्थान सीमित नहीं है। आज चारों तरफ बंदरों का आतंक बढ़ रहा है। हाल ही में उनके पड़ोसी बंदरों को भगाने के लिए छत पर गए थे कि अचानक वह सिर के बल गिर गए। उनका हल्द्वानी में उपचार चल रहा है, जिसमें लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। आज अल्मोड़ा में स्थिति ऐसी हो गई है कि छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग तक बंदरों से काफी डरे हुए हैं। बंदर घरों के अंदर से भी सामान उठाकर ले जाते हैं। एक समय था, जब बंदर चितई मंदिर या इसके आसपास ही जंगलों में दिखाई दिया करते थे लेकिन अब वे हर गली-मोहल्ले में देखने को मिल रहे हैं।
दूसरे जिलों से छोड़ रहे बंदर
प्रीति बिष्ट ने बोला कि अल्मोड़ा में कटखने बंदरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। बंदरों के डर से अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय छोड़ने और लाने के लिए आ रहे हैं। बंदरों से निजात दिलाने के लिए नगर निगम को ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि जनता को राहत मिल सके। अजय मित्र बिष्ट ने बोला कि धीरे-धीरे हमारा वन क्षेत्र काफी कम होता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों में बंदरों का दिखना काफी बढ़ गया है। दूसरे जिलों से भी बंदरों को यहां पर छोड़ा जा रहा है। इसे रोकने के लिए बड़े वाहनों की लगातार चेकिंग होनी चाहिए। बंदरों की नसबंदी भी होती रहनी चाहिए ताकि इनकी संख्या कम हो सके।

