उत्तराखण्ड

पहाड़ में जनेऊ धारण करने से दूर रहती हैं नकारात्मक शक्तियां

उत्तराखंड के बागेश्वर में जनेऊ को बहुत पवित्र माना जाता है पहाड़ में जनेऊ पहनने का विशेष महत्व होता है मान्यता है कि जनेऊ धारण करने से आयु, बल और बुद्धि में वृद्धि होती है जनेऊ धारण करने से शुद्ध चरित्र और जप, तप, व्रत की प्रेरणा मिलती है पुराने समय में पहाड़ के प्रत्येक घर में जनेऊ बनाया जाता था जनेऊ धारण करना 16 संस्कारों में विशेष संस्कार माना गया है

Images 2024 12 26t113524. 418

WhatsApp Group Join Now

बहुत खास है ये धागा
बागेश्वर के क्षेत्रीय जानकार उमेश शाह ने लोकल 18 को कहा कि जनेऊ धारण करने से नैतिकता और इन्सानियत के पुण्य कर्तव्यों को पूरा करने का आत्म बल मिलता है जनेऊ धारण करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है ऐसी मान्यता है कि मानव जीवन में जब तक लड़के को जनेऊ धारण नहीं कराया जाता तब तक उसे किसी भी संस्कार के लिए अपवित्र माना जाता है

जनेऊ धारण करने के बाद ही लड़के को शादी, पूजा और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के लिए शुद्ध माना जाता है वर्तमान में युवा पीढ़ी को आधुनिकता के साथ ही अपने संस्कारों को भी संरक्षित करके रखना चाहिए साथ ही जनेऊ धारण के नियमों के बारे में जानकारी लेनी चाहिए

जनेऊ धारण करने के लाभ
जनेऊ का सनातन धर्म के साथ ही उत्तराखंड में भी विशेष महत्व है मान्यता है कि जनेऊ धारण करने के बाद लड़के के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव होते हैं इसे धारण करने के बाद लड़का अपने घर और समाज के हिसाब से संतुलन बनाकर कार्य करता है जनेऊ के बाद लड़के को संस्कारवान माना जाता है

इसे धारण करने से शिक्षा और आध्यात्मिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने में भी सहायता मिलती है साथ ही मन को बुरे कार्यों से बचाया जा सकता है जनेऊ धारण करने से कई स्वास्थ्य संबंधी फायदा भी प्राप्त होते हैं, जैसे कब्ज, एसीडीटी, पेट रोग, मूत्रन्द्रीय रोग, रक्तचाप, दिल के रोगों से मुक्ति मिलती है

जनेऊ धारण करने के नियम 
मानव जीवन में लड़का जब जनेऊ धारण करता है तो उसे विशेष नियमों का पालन करना होता है जनेऊ को बाएं कंधे के ऊपर से दाई भुजा के नीचे पहना जाता है जनेऊ के तीन या छह धागे (पल्ली) होते हैं, जिन्हें देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण का प्रतीक माना जाता है विवाहित आदमी या गृहस्थ आदमी के लिए छह धागों वाला जनेऊ होता है पुराने जमाने में जब घर में जनेऊ बनाया जाता था तो उसकी उंगलियों से नाप लेकर धागे को 96 बार लपेटा जाता था, तब जाकर एक जनेऊ तैयार होता है

Back to top button