‘कंबल’ के अंदर ही ‘मंगल’ करते हैं ये चमत्कारी बाबा, खतरनाक रोगों से दिलातें हैं मुक्ति
बागेश्वर बाबा पं। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को आज कौन नहीं जनता। राष्ट्र क्या पूरी दुनिया में उनके दिव्य दरबार की धूम है, जहां भक्तों की अर्जी लगती है और उनकी समस्याओं को दूर करने का दावा किया जाता है। अब मध्य प्रदेश में ही एक और बाबा की एंट्री हो गई है। सागर जिले के आदिवासी अंचल में इन दिनों एक काली कंबल वाले बाबा का दरबार सज रहा है। इस दरबार में महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना, असम और गुजरात तक से लोग पहुंच रहे हैं।

बाबा का दावा है कि वह अपने 48 वर्ष पुराने कंबल से टूटी हुई हड्डियां, लकवा, कैंसर, बीपी शुगर, गूंगा-बहरापन जैसे कई असाध्य रोगों का उपचार कर सकते हैं। इसी आस्था और अंधविश्वास में उलझ कर लोग इस दरबार में बड़ी आशा और आशा के साथ पहुंच रहे हैं। हालांकि, लोकल 18 बाबा के किसी भी दावे की पुष्टि नहीं करता है। सागर से करीब 52 किलोमीटर दूर केसली ब्लॉक के पटना गांव में गणेश यादव उर्फ काली कंबल वाले बाबा का दरबार लगा हुआ है।
किसी भी बीमारी को दूर करने का दावा
कंबल वाले बाबा का बोलना है कि उनके पास ऐसे लोग आते हैं जो चिकित्सक से अपना उपचार करवा चुके हैं, लेकिन आराम नहीं मिला है। बाबा का दावा है कि उनके दरबार में पांच बैठकी करने पर किसी भी तरह का बीमारी हमेशा के लिए जड़ से समाप्त हो जाता है। ऐसा वह स्वयं की वजह से नहीं, बल्कि माता से मिले आशीर्वाद की वजह से कह पा रहे हैं। कंबल वाले बाबा कहते हैं कि 4 वर्ष की उम्र में माता की प्रेरणा से यह कंबल मिला है। उनके पास कुछ नहीं है। यह जो करिश्मा है, वह कंबल ही दिखाता है, लेकिन किसी भी रोगी को उनके पांच दरबार में शामिल होना पड़ता है।
सब कंबल का कमाल!
बाबा के दरबार में कई लोग ऐसे नजर आते हैं, जो दूसरों के सहारे ही खड़े होते हैं या बैठते हैं, लेकिन बाबा द्वारा सिर से कंबल निकालने और उनके दर्द के हाथ पर थपथपाने के बाद उन्हें कुछ आराम मिलता है। कुछ लोग चलने का कोशिश करते हैं। कुछ चलकर दिखाते हैं। हालांकि, इसमें कितनी सच्चाई है इसके बारे में कुछ बोला नहीं जा सकता।
दरबार में आए भक्तों ने कहा…
छत्तीसगढ़ के बिजावर से आए एक बुजुर्ग ने कहा कि वह अपनी बेटे को लेकर आए। पहले उसे चलाने के लिए खींचना पड़ता था। एक देवरी वाला कैंप किया था, जिसमें 10 से 15 प्रतिशत आराम लगा है। उन्होंने बोला कि पांच कैंप करने पड़ेंगे। यदि मेरा बेटा ठीक हो गया तो मैं अपने जिले में अभी यह दरबार लगवाऊंगा। गुना से आए रमेश ने कहा कि उनका छोटा बेटा है। बोल नहीं पता है। सुनने में भी परेशानी है। कंबल वाले बाबा को दिखाया, जिसके बाद लग रहा कि उसे कुछ-कुछ सुनाई देने लगा है। अभी और कैंप करेंगे फिर देखेंगे।

