इस सेवा ने जीता दिल, जानिए क्यों रेलवे ने 3 साल तक ढोई केवल एक खास सवारी…
इस समय दीपावली और छठ पूजा की वजह से ट्रेनों में जमकर मारामारी चल रही है. कुछ रूटों पर चलने वाली ट्रेनों मे लोगों को धक्का मुक्की करके यात्रा करनी पड़ रही है, वेटिंग टिकट तक नहीं मिल रहा है. लेकिन आपसे बोला जाए कि एक स्थान सिर्फ़ एक पैसेंजर के लिए ट्रेन चलानी पड़ी. तो शायद आपको एक बारगी विश्वास न हो, लेकिन यह सच है. काफी समय तक इस ट्रेन से सिर्फ़ एक छात्रा ही यात्रा करती रही. आइए जानते हैं पूरा मुद्दा क्या है?

देशभर 13000 से अधिक ट्रेनें चलती हैं. इसमें शताब्दी, राजधानी जैसी प्रीमियत ट्रेनों के अतिरिक्त सबअर्बन ट्रेनें भी शामिल हैं. सामान्य तौर पर 24 कोच की ट्रेन में 1200 से 1400 यात्री यात्रा करते हैं, लेकिन फेस्टिवल सीजन में यह संख्या और बड़ी जाती है. जनरल और स्लीपर कोचों में और हाल खराब हो जाता है.
वहीं, जापान के होक्काइडो द्वीप में काफी समय तक एक ही छात्रा के लिए ट्रेन चलानी पड़ी. वर्ष 2016 में इस द्वीप के क्यु-शिराताकी स्टेशन को बंद करने का निर्णय लिया गया. पर एक छात्रा काना हराडा विद्यालय में पढ़ती थी और वहां जाने का एक ही साधन ट्रेन थी. काना ग्रेजुएट कर रही थी. छात्रा ने ट्रेन ऑपरेशन कंपनी से गुहार लगाई. यदि स्टेशन बंद हो जाएगा तो ट्रेन नहीं रुकेगी और बगैर ट्रेन कालेज पहुंचना कठिन है. इससे पढ़ाई बंद हो जाएगी. शिक्षा को महत्व को देखते हुए तीन वर्ष तक अकेले यात्रा कराना पड़ा. तीन वर्ष तक स्टेशन को खुला रखा है. ज्यादातर समय छात्रा के अतिरिक्त दूसरा यात्री नहीं होता था. हर सुबह और शाम ट्रेन एक ही छात्रा को लेकर जाती और वापस छोड़ती.
दरअसल इस द्वीप में लोगों की संख्या लगातार कम हो रही थी. जनसंख्या घटकर सिर्फ़ 36 ही रह गयी थी. इस वजह से ट्रेन चलाने वाली कंपनी ने स्टेशन को बंद करने का निर्णय लिया. क्योंकि यहां पर यात्रियों की संख्या न के बराबर थी और स्टेशन को खोलने में काफी ज्यादा खर्च आ रहा था. इस वजह से ट्रेन चलाने वाली कंपनी ने इसे बंंद करने का निर्णय किया.

