मेघालय की इस छोटे से गांव में सबसे ज़्यादा बारिश का रहता है रिकॉर्ड
मानसून के मौसम के प्रारम्भ होते ही राष्ट्र के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है, जिससे कुछ राज्यों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. हालाँकि, क्या आपने कभी सोचा है कि किस राज्य में सबसे ज़्यादा बारिश होती है और क्यों? आज हम एक ख़ास क्षेत्र में अत्यधिक बारिश के पीछे की वजह और यह क्यों रुकने से इनकार करती है, इस बारे में जानेंगे.
मानसून का मौसम अपने साथ चिलचिलाती गर्मी से राहत का वादा लेकर आता है और लोग अक्सर घर के अंदर रहकर आरामदायक मौसम का आनंद लेते हैं. हालांकि, जब बारिश कई दिनों तक जारी रहती है, जिससे जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है, तो यह चिंता का विषय बन जाता है. अत्यधिक बारिश न सिर्फ़ दैनिक जीवन को बाधित करती है, बल्कि सभी गतिविधियों को भी ठप कर देती है.
मेघालय की राजधानी शिलांग से 60 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा सा गांव मावसिनराम हिंदुस्तान में सबसे ज़्यादा बारिश का रिकॉर्ड रखता है. आश्चर्यजनक रूप से, यह चेरापूंजी से भी आगे निकल गया है, जिसे पहले धरती पर सबसे ज़्यादा बारिश वाला जगह माना जाता था. मावसिनराम में हर वर्ष औसतन 11,871 मिमी बारिश होती है, जिसमें से 90% बारिश केवल छह महीनों के भीतर होती है. जुलाई में सबसे ज़्यादा बारिश होती है, जो औसतन 3,282 मिमी होती है.
मावसिनराम की भौगोलिक स्थिति इसकी अत्यधिक वर्षा का मुख्य कारण है. पूर्वी खासी पहाड़ियों में स्थित यह गांव पहाड़ों से घिरा हुआ है जो दक्षिण-पश्चिम मानसून के बादलों के मार्ग को अवरुद्ध करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारी वर्षा होती है. क्षेत्र की अनूठी स्थलाकृति बादलों को ऊपर उठने, ठंडा होने और संघनित होने के लिए विवश करती है, जिससे लगातार बारिश होती है.
मौसिनराम की रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान दिलाई है. दिलचस्प बात यह है कि मौसिनराम से केवल 10 मील दूर चेरापूंजी में अपने समकक्ष की तुलना में 100 मिमी कम बारिश होती है. जबकि चेरापूंजी को कभी धरती पर सबसे ज़्यादा बारिश वाला जगह माना जाता था, मौसिनराम ने इसकी स्थान ले ली है, जहाँ औसत वार्षिक वर्षा अपने पड़ोसी की तुलना में 4 इंच ज़्यादा है.
निष्कर्ष के तौर पर, मावसिनराम की अनूठी भौगोलिक स्थिति और जगह इसे हिंदुस्तान का सबसे नम जगह बनाते हैं, जहाँ बारिश रुकने का नाम नहीं लेती. जहाँ मानसून का मौसम राष्ट्र के कई हिस्सों में राहत लेकर आता है, वहीं मावसिनराम की अत्यधिक वर्षा इस क्षेत्र की विशिष्ट स्थलाकृति और जलवायु का प्रमाण है.

